शादी करने वालों की नागरिकता जाएगी

शादी करने वालों की नागरिकता जाएगी

आए दिन हमें विरोध जताने की नई-नई मिसालें सुनने और देखने को मिलती है. लेकिन अगर इसमें आपको अपने देश की नागरिकता से ही हाथ धोना पड़ जाय, वो भी जब आपने किसी ख़ास देश की युवती से विवाह किया हो, तब!

मिस्र में ऐसी ही एक मिसाल देखी जा रही है.

मिस्र में क़ाहिरा स्थित सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने निचली अदालत के उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसके तहत मिस्र के उन नागरिकों की नागरिकता छीन ली जाएगी जिन्होंने इसराइल की महिलाओं से विवाह किया है.

निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च अदालत में अपील की थी.

इस फ़ैसले को इसराइल के प्रति मिस्र की नकारात्मक भावना के तौर पर देखा जा रहा है. वैसे, इसराइल के साथ मिस्र का शांति समझौता 30 वर्षों से अधिक पुराना है.

मिस्र में इन दिनों इसराइल विरोधी भावनाएं काफी बढ़ गईं हैं. पिछले दिनों ग़ज़ा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे जहाज़ों को इसराइली सेना ने निशाना बनाया था. लेकिन अदालत का यह फ़ैसला इन घटनाओं से जुड़ा नहीं है क्योंकि ये मामला अदालत में काफी समय से लंबित था.

बच्चों की भी नागरिकता जाएगी

क़ाहिरा स्थित सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि गृह मंत्रालय को मिस्र के उन सभी पुरुषों का ब्यौरा उपलब्ध कराना चाहिए जिन्होंने यहूदी और अरब इसराइली युवतियों से विवाह किया है.

हर मामले पर अलग-अलग विचार किया जाएगा. लेकिन इसके बाद ऐसे लोगों और उनके बच्चों से मिस्र की नागरिकता छीनी जा सकती है.

एक अनुमान के मुताबिक़ मिस्र के क़रीब 30,000 लोगों ने इसराइल की महिलाओं से विवाह किया है.

इन मामलों पर बहस करने वाले वकील नबिह अल-वहश ने बताया कि ऐसे लोगों के बच्चों को सैन्य सेवाओं की मंज़ूरी नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस क़दम का उद्देश्य मिस्र के युवा लोगों और राष्ट्रीय सुरक्षा को संरक्षण प्रदान करना है.

उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी को मिस्र और अरब देशों के प्रति निष्ठा में कमी नहीं लानी चाहिए.”

मिस्र की एक स्थानीय अदालत ने पिछले साल फ़ैसला सुनाया था कि मिस्र की नागरिकता क़ानून के अनुच्छेद 1976 को लागू किया जाना चाहिए.

यह अनुच्छेद मिस्र के उन पुरूषों की नागरिकता छीनने की बात करता है जिन्होंने इसराइली महिलाओं से विवाह किया है या जिन्होंने यहूदी धर्म को स्वीकार कर लिया है.

निचली अदालत के इस फ़ैसले को मिस्र की सरकार ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी. लेकिन सर्वोच्च अदालत ने सरकार की अपील को ख़ारिज करते हुए निचली अदालत के फ़ैसले को बहाल रखा है.

'शादी का मतलब जासूसी'

मिस्र में वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता नेगाद अल-बोरानी ने कहा कि वे इस फैसले से हतप्रभ हैं. उन्होंने आश्चर्य जताया कि मिस्र की सरकार इसराइल के बारे में अलग-अलग संदेश दे रही है.

उन्होंने कहा, “मिस्र के राष्ट्रपति राष्ट्रीय छुट्टियों के मौकों पर इसराइल के राष्ट्रपति को बधाई संदेश देते हैं, बावजूद इसके वे इसराइल के साथ संबंध रखने वाले लोगों को दंडित कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “मिस्र के क़ानूनों के मुताबिक़ किसी व्यक्ति की नागरिकता तभी छीनी जा सकती है जब उन पर किसी देश के लिए जासूसी करने के आरोप साबित हो जाएं. हाल के फ़ैसले से तो यही लग रहा है कि इसराइली से शादी करना जासूसी का काम है.”

मिस्र पहला अरब देश था जिसने इसराइल के साथ 1979 में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इसके बाद से ही हज़ारों की संख्या में मिस्र के नागरिक काम की तलाश में इसराइल गए और इसराइली युवतियों से विवाह किया.

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