उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात पर अमेरिका ने नहीं दी राहत

वाशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात को आसान बनाने की भारत की मांग पर ओबामा प्रशासन ने अनुकूल प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भारत-अमेरिका रणनीतिक वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, "इस वार्ता के दौरान दोनों देशों ने निर्यात नियंत्रण (उच्च प्रौद्योगिकी पर) के मसले को सुलझाने के लिए संकल्प व्यक्त किया।"

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि दोनों देशों ने उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इस साझेदारी के लिए अपने सामूहिक लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

कृष्णा और क्लिंटन ने कहा, "रणनीतिक साझेदारी के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, मार्च 2010 में वाशिंगटन में आयोजित हुई उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह की सांतवी बैठक में, इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के महत्व को चिन्हित किया गया है।"

उन्होंने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था में आया सुधार उत्साहजनक है लेकिन यह सुधार अनिश्चितताओं से युक्त है और स्थिर विकास के लिए जी-20 देशों समेत वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है, जिसके अंतर्गत व्यापार नीतियों में लचीलापन और विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है।"

दोहा दौर की वार्ता के संतुलित और महत्वाकांक्षी निष्कर्ष के लिए तर्कसंगत जनमत जुटाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा, "जी -20 के सदस्य होने के नाते वे इस समूह में ऊर्जा सुरक्षा सहित सभी तरह के संरक्षणवाद के विरोध में आपसी समझ बढ़ाने का प्रयास करेंगे।"

बयान में कहा गया, "दोनों देशों के बीच आधारभूत संरचना के क्षेत्र में निवेश और वित्तीय क्षेत्र में सुधारों के मुद्दे पर अप्रैल 2010 में हुए समझौते से दोनों देशों को मजबूत, संतुलित और स्थिरता पूर्ण विकास में मदद मिलेगी। "

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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