मोबाइल पर पुनर्जीवित हुई दम तोड़ती शायरी
बेंगलुरू। आईटी कंपनी में काम करने वाले नीरज सिन्हा सुबह से काफी तनाव में थे। ऑफिस में काम का लोड और परिवार को लेकर उलझनें। जिस वजह से ऑफिस जाते वक्त भी उनका मूड उखड़ा-उखड़ा था। वो घर से निकले ही थे कि उनका मोबाइल बजा। फोन रिसीव करने पर सुनाई पड़ा- वक़्त कहता है मैं फिर न आउंगा, तेरी आंखों को न अब रुलाउंगा। जीना है तो इस पल को जी लो, शायद मैं कल तक न रुक पाउंगा... यह शायरी सुन नीरज का चेहरा खिल उठा और वो अपने सारे तनाव भुलाकर काम पर चल दिया।
जी हां आप भी अपने दिन भर के तनाव को दूर कर सकते हैं। क्योंकि हिन्दुस्तान की विरासत कही जाने वाली उर्दू शायरियां अब मंच तक सीमित नहीं रह गई हैं। ये शायरियां आपके मोबाइल फोन तक पहुंच गई हैं। इसकी शुरुआत रिलायंस मोबाइल ने की है। भले ही इसके पीछे व्यवसायिक मकसद छिपा है, लेकिन यह मत भूलिए कि मोबाइल फोन पर इस चलन के बाद अब शायरियां लखनऊ, अलीगढ़, भोपाल और इंदौर तक सीमित नहीं रहेंगी। बेंगलुरू, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और मैंगलोर में रह रहे लोगों तक पहुंचेगी। मोबाइल पर शायरियों की खासियत यह है कि 10 रुपए में आप शायरियां सुन सकते हैं। शायरी कहने का अंदाज भी शायरों वाला ही रहेगा, न कि आम आदमी जैसा। आपको एसएमएस पर शायरियां नहीं मिलेंगी।
दिल्ली के मार्केटिंग एनालिस्ट शारद राय ने इस पर कहा कि मोबाइल मार्केटिंग की बात करें तो जिस प्रकार खबरें, चुटकुले, राशिफल, थॉट ऑफ दि डे, आदि तेजी से फैले, उसी प्रकार अब शायरियों का नंबर है। आज रिलायंस ने शुरुआत की है, कल एयरटेल, परसों आईडिया और फिर सभी कंपनियां शायरियों को प्रोमोट करेंगी।
शायरियां सुनने का शौक रखने वाले तंजीम अब्बास मोबाइल पर इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा उन्हें मिलेगा, जिनके पास मुशायरा सुनने के लिए ऑडीटोरियम तक जाने या टीवी चैनलों पर सर्च करने का समय नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि देश के कुछ ही शहरों में शायरियों का शौक रखने वाले लोग हैं। यही नहीं इन शहरों में भी अब साल में एक दो मुशायरे ही होते हैं। हां अच्छा होगा अगर मोबाइल कंपनियां शायरी सुनाने से पहले शायरों के नाम भी बता दें, जिससे उन शायरों की पहचान फिर से बन सके, जो आज गुमनाम हो गए हैं।












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