विवादास्पद सुरक्षाकर्मियों के सम्मान पर नेपाल में रोष
काठमांडू, 31 मई (आईएएनएस)। नेपाल में गणतंत्र दिवस समारोह में विवादास्पद लोगों और सैन्यकर्मियों को सम्मानित किए जाने के बाद देश की सरकार को नए आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।
दो साल की अवधि में नया संविधान लिखने में असफल रही नेपाल सरकार को सोमवार को मानवाधिकार संगठनों, लोकतंत्र के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के परिजनों और यहां तक कि मुख्य न्यायाधीश के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ये सभी पूर्व विवादास्पद सुरक्षाकर्मिर्यो के सम्मान के मुद्दे पर सरकार से खफा हैं।
लोकतंत्र के समर्थन में वर्ष 2006 में तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोली का शिकार हुए युवक की मां के नेतृत्व में सोमवार को राजधानी में हजारों लोगों ने ताजा विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने कालांकी क्षेत्र को घेर लिया और यातायात को अवरुद्ध किया। उनकी मांग थी कि प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल की सरकार नए सम्मानों को वापस ले। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इसमें पूर्व विवादास्पद सुरक्षाकर्मियों को सम्मानित किया गया है।
वर्ष 2006 में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गए अपने बेटे सगुन ताम्रकार को याद करती हुईं जया ताम्रकार ने कहा, "सरकार हमारे जख्मों पर मरहम लगाने की बजाए उनपर नमक छिड़क रही है।"
सगुन ताम्रकार लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में हिस्सा लेते हुए मारा गया था और विडंबना यह है कि इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के चलते वर्तमान सरकार सत्ता में आ सकी है।
जया ताम्रकार व वर्ष 2006 के प्रदर्शनों में मारे गए अन्य लोगों के परिजन रविवार को नेपाली कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर इकट्ठे हो गए थे और उन्होंने नए सम्मानों की निंदा की थी लेकिन पार्टी अधिकारियों का कहना है कि वे राज्य के इस कदम से अनभिज्ञ थे।
वर्ष 2008 से 29 मई को नेपाल का गणतंत्र दिवस मनाने की शुरुआत हुई है। इस बार इस खास दिन दर्जनों विवादास्पद व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें सत्तारूढ़ दल के नजदीकी और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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