बुद्घ पूर्णिमा पर 6 किलोमीटर लंबी शोभायात्रा निकाली
वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर बौद्घ भिक्षुओं ने गुरुवार को करीब छह किलोमीटर लंबी शोभा यात्रा भी निकाली। शोभा यात्रा में भगवान बुद्घ के जीवनशैली से संबंधित झांकियां सजाई गई थीं। इसमें देश-विदेश से आए बौद्घ अनुयायिओं समेत भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया।
बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन भगवान बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था और इसी दिन उन्हें बोधगया में ज्ञान और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी। लिहाजा त्रिबिध पावन बौद्घ धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। इन तीनों पर्व के संगम को ही त्रिबिध पावन बुद्घ जयन्ती के रूप में मनाया जाता है।
भगवान बुद्घ की 2554वीं त्रिबिध पावन बुद्घ जयन्ती के अवसर पर विदेशी धर्मावलंबी काफी संख्या में मौजूद रहे। यहां आए धम्मेनेना भंती बौद्घ भिक्षु ने कहा कि कुशीनगर बौद्घों के लिए बहुत ही पवित्र स्थान है। चार बौद्घ तीर्थो स्थलों में कुशीनगर अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि इसी पवित्र धरती पर भगवान बुद्घ ने अन्तिम सांस ली थीं।
दिवाकर भंते बौद्घ भिक्षु ने कहा कि भगवान बुद्घ को समूचा विश्व गुरु मानता है। वैशाख पूर्णिमा बौद्घों का एक पवित्र पर्व है और इसे भव्यता के साथ मनाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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