चीन समझता है भारत को, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में समर्थन नहीं
कविता बजेली दत्त
बीजिंग, 27 मई (आईएएनएस)। चीन ने अभी तक संयुक्त राष्ट्र में भारत की दावेदारी का खुलकर समर्थन नहीं किया है हालांकि भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने गुरुवार को कहा कि इस मसले पर बात आगे बढ़ी है और चीनी नेतृत्व ने इस मसले पर अनुकूल रुख दिखाया है।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील इन दिनों चीन दौरे पर हैं। उन्होंने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ कई दौर की बैठकें कीं। चीन के छह दिवसीय दौरे पर पाटील बुधवार को यहां पहुंची थीं।
राव ने गुरुवार शाम संवाददाताओं से कहा, "चीन भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिक भूमिका की इच्छा और आकांक्षा को समझता है। वह यह भी समझता है कि सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़नी चाहिए।"
राष्ट्रपति ने विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट का मुद्दा उठाया था। राव ने कहा कि इस मुद्दे पर चीन की ओर से सकारात्मक बयान इस बात को दर्शाता है कि हमारी भावनाओं को वह समझ रहे हैं।
विदेश सचिव ने चीन के बयान को 'सकारात्मक बदलाव' और आगे की ओर बढ़ाया गया कदम करार दिया।
उन्होंने कहा कि हम उनके साथ संपर्क में हैं और आगे भी बातचीत करेंगे। राव ने कहा कि इस मसले पर दिया गया चीन का बयान कूटनीतिक भाषा नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि यह सही संचार की स्थापना है।
राव ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2011-12 के लिए भारत के अस्थायी सीट का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने चीन के साथ सीमा विवाद पर भी चर्चा की। इस दौरान राष्ट्रपति ने सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहाद्र्र कायम रखने पर जोर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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