कनाडा वीजा विवाद : भारत करेगा कार्रवाई (लीड-1)
वीजा विवाद ठीक उस समय उपजा है, जब भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कनाडा यात्रा में एक महीने से भी कम समय बचा है।
गृह सचिव जी.के. पिल्लै ने कहा कि इस बारे में विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा गया है। अगर कनाडा के उच्च अधिकारियों ने अपना नजरिया नहीं बदला तो भारत जवाबी कार्रवाई के लिए विवश हो जाएगा।
गृह सचिव जी.के. पिल्लै ने कहा, हमने इस बारे में विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। यदि कनाडा ने जवाब नहीं दिया तो हम कठोर कदम उठाएंगे।
यह पूछने पर कि यदि कनाडा ने वीजा जारी नहीं किया तो क्या कार्रवाई की जाएगी, उन्होंने कहा कि अभी हम इंतजार कर रहे हैं। यह उसके रवैये पर निर्भर करता है।
पिल्लै ने कहा कि भारत कुछ दिनों तक और प्रतीक्षा करेगा, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, हम उसके जवाब का इंतजार करेंगे। हमने उसे कुछ दिन का समय दिया है।
भारत क्या कार्रवाई करेगा, इस पर कुछ स्पष्ट न करते हुए उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि भारत इस बात पर क्षुब्ध है कि कनाडा विजातीय आधार पर वीजा देने से क्यों इंकार कर रहा है।
पिल्लै ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कनाडा उच्चायोग को इस बारे में सम्मन जारी किया है और उससे स्पष्टीकरण मांगा है।
उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक बदले की कार्रवाई के तहत एक रास्ता यह है कि भारत से होकर अफगानिस्तान जाने वाले कनाडा के अधिकारियों को वीजा नहीं दिया जाए।
सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय चाहता है कि कनाडा उच्चायोग इस बारे में टिप्पणी दे और वीजा निरस्त करने के लिए जवाबदेह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके भारतीय सैन्य अधिकारी ए.एस. बहिया जो अब चंडीगढ़ में सैन्य बल ट्रिब्यूनल के सदस्य हैं, का वीजा इस आधार पर नहीं दिया गया, क्योंकि उन्होंने जम्मू और कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सेवा दी थी।
दूसरे मामले में 2008 व 2009 में दो ब्रिगेडियरों को वीजा नहीं दिया गया।
इसी तरह 26 मार्च को सेवानिवृत्त खुफिया ब्यूरो के अधिकारी एस.एस. सिद्धू को कनाडा उच्चायोग ने वीजा देने से इंकार कर दिया था।
निरस्तीकरण पत्र में कनाडा उच्चायोग ने लिखा था कि सिद्धू को वीजा इसलिए नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उन्होंने खुफिया ब्यूरो जैसे संगठन के लिए काम किया है और उनसे कनाडा वासियों के जीवन को खतरा हो सकता है।
सिद्धू का कहना है कि वह अपनी बेटी का नया घर देखने के लिए कनाडा जाना चाहते थे। भारत से मैत्रीपूर्ण संबंध रखने वाले देश कनाडा के उच्चायोग से ऐसा पत्र मिलने से वह क्षुब्ध हैं। इससे भारत के सम्मान को भी ठेस पहुंचा है।
उधर, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने वीजा विवाद से लोगों में पनप रहे आक्रोश से सरकार को अवगत कराया है और कनाडा सरकार के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीता रमैया ने कहा कि वीजा नहीं देने के बहाने सुरक्षा बलों में तैनात व सेवानिवृत्त अधिकरियों पर की गई कनाडा के उच्च अधिकारियों की टिप्पणी खेदपूर्ण है। पार्टी इसकी भर्त्सना करती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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