हानिकारक हो सकते हैं डिटर्जेट, शैम्पू

एक नए अध्ययन में जल प्रदूषण के इस पर्यावरणीय स्रोत नाइट्रोसोडाईमिथाइलएमीन या एनडीएमए पर नई जानकारी सामने आई है। यह एक अर्ध-वाष्पशील कार्बनिक रसायन है, जो बहुत जहरीला होता है और इंसानों में यह कैंसर की वजह बन सकता है।

येल विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता विलियम मिट के मुताबिक वैज्ञानिक जानते हैं कि अपशिष्ट जल और क्लोराएमीन की मौजूदगी वाले जल के शुद्धीकरण के दौरान अल्प मात्रा में एनडीएमए एवं अन्य नाइट्रोसएमीन्स (प्रौटीन में मौजूद नाइट्रेट्स से बने रासायनिक यौगिक) बन सकते हैं।

यद्यपि नाइट्रोसएमीन्स कई चीजों में होते हैं। ये प्रसंस्कृत मांस और तंबाकू के धुएं में होते हैं। वैज्ञानिकों को पानी में इनके निर्माण के कारकों के विषय में बहुत कम जानकारी है।

पूर्व में हुए अध्ययन बताते हैं कि सौंदर्य प्रसाधनों और घर की साफ-सफाई में इस्तेमाल होने वाले क्लीनिंग एजेंट्स में मौजूद घटक नाइट्रोसएमीन्स के बनने में भूमिका निभाते हैं।

प्रयोगशाला में हुए शोध से पता चला है कि क्लोराएमीन को शैम्पू, डिटर्जेट के साथ मिलाने पर एनडीएमए बनता है।

अमेरिकन कैमिकल सोसायटी (एसीएस) द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक सीवेज उपचार संयंत्र एनडीएमए से कुछ चतुर्थ एमीनों को बाहर निकाल देते हैं। यद्यपि जल में ये एमीन इतनी अधिक मात्रा में होते हैं कि शुद्धीकरण के बावजूद जल में कुछ मात्रा में उनकी मौजूदगी रह जाती है। यही एमीन्स मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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