रजवाड़ों की हेरिटेज शराब को नहीं मिले मयखाने
जयपुर, 26 मई (आईएएनएस)। राजे-रजवाड़ों की करीबी रहीं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के सुझ्झाव पर उनकी सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान सरकारी कम्पनी गंगानगर शुगर मिल्स में तैयार की गई हेरिटेज शराब को खरीददार नहीं मिल पा रहा है।
मिल प्रबंधन को किसी ऐसे मयखाने की तलाश है जो रजवाड़ों के इस महंगे शौक की कद्र करता हो। हेरिटेज शराब की करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की दस हजार पेटियां बिक्री के अभाव में जयपुर स्थित मिल के गोदाम में तीन साल से रखी हैं।
मिल के लिए घाटे का सौदा साबित हुई शराब को राज्य सरकार अब किसी भी तरह बेचने की जुगत लगा रही है। सरकार ने सोमवार को आबकारी शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती करके इसके भारी भरकम दामों में कमी करने की कोशिश की है। वर्तमान में हेरिटेज शराब का दाम प्रति बोतल पांच सौ रुपये से 2400 रुपये तक है।
राजस्थान गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड के निदेशक रायसिंह गोदारा का कहना है कि आबकारी शुल्क में कमी से शराब 100 से 450 रुपये तक सस्ती हो जाएगी। जिसके बाद इसकी बिक्री होने की उम्मीद है। गोदारा का कहना है दाम कम होने के बाद हेरिटेज शराब सेना को सप्लाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस बारे में रक्षा मंत्रालय से बातचीत चल रही है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी इस मिल के प्रस्ताव पर सहमत भी हो गए हैं। गोदारा के अनुसार रक्षा मंत्रालय के सुझ्झाव पर मिल ने राज्य सरकार के समक्ष शराब पर करों में कमी करने का अनुरोध किया था।
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे के सुझ्झाव पर वर्ष 2005 में हेरिटेज शराब का उत्पादन शुरू किया गया था। इसके लिए शराब बनाने वाले पूर्व राजघरानों की मदद भी ली गई। उनसे शराब बनाने का फार्मूला खरीदा गया। मिल ने जयपुर में इसके लिए अगल से एक कारखाना भी खोला।
गोदारा का कहना है की जिस विचार के साथ हेरिटेज शराब का उत्पादन शुरू किया गया उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए पुख्ता मार्केटिंग और विज्ञापन नहीं किया गया। ऊपर से यह शराब इतनी महंगी है कि इसे बाजार नहीं मिला और दो साल बाद ही इसका उत्पादन बंद कर दिया गया।
फिलहाल मिल के गोदाम में करीब दस हजार पेटी शराब रखी है। जिसकी कीमत करीब पांच करोड़ रुपये है। मिल प्रबंधन को उम्मीद है कि आबकारी शुल्क में कमी से गोदाम में रखे स्टॉक को सेना खरीद लेगी। और फिर उसके बाद इसका उत्पादन स्थाई रूप से बंद कर दिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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