मल्टी-ब्रांड खुदरा में विदेशी निवेश का विरोध
नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। देश की दो वामपंथी पार्टियों ने सरकार से मल्टी-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश की इजाजत न देने की अपील की है। वामपंथी पार्टियों का कहना है कि इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की इजाजत देने से लाखों लोगों की जीविका संकट में पड़ जाएगी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान में कहा, "यह आश्चर्यजनक कदम है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ऐसा करने पर विचार कर रही है, जबकि स्वयं कांग्रेस पार्टी ने इस क्षेत्र में विदेशी निवेश के खिलाफ 2006 में हैदराबाद में आयोजित एआईसीसी बैठक में प्रस्ताव पारित किया था।"
यह बयान एक समाचार पत्र में प्रकाशित उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय कुछ जरूरी शर्तों के साथ मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत देने पर विचार कर रहा है।
दोनों पार्टियों ने कहा है कि खुदरा क्षेत्र से देश के लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। यदि वॉलमार्ट और टेस्को जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश की इजाजत दे दी गई तो इन लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
बयान में कहा गया है, "राजनीतिक दलों का बड़ा तबका, खुदरा व्यापार संगठन और जनमत इस कदम के खिलाफ है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को मल्टी-ब्रांड रिटेल क्षेत्र में विदेशी निवेश की इजाजत देने से परहेज करना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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