स्टेम सेल प्रत्यारोपण से बचाया पाकिस्तानी बच्चे का जीवन

चिकित्सकों ने सोमवार को बताया कि इस्लामाबाद के शहीर को मार्च में दिल्ली लाया गया था। उसके माता-पिता उसकी प्रतिरोधकता संबंधी बीमारी फैमिलिएल एचएलएच के इलाज के लिए उसे यहां लाए थे। इस बीमारी में जब तक स्टेम सेल प्रत्यारोपण न हो तब तक मरीज की जान को खतरा बना रहता है। शहीर की शल्य चिकित्सा 15 मार्च को हुई थी।

अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग में वरिष्ठ सलाहकार अनुपम सचदेवा ने कहा, "यह भारत में असंबंधित रक्त स्टेम सेल प्रत्यारोपण का पहला मामला है।"

स्टेम सेल्स रक्त में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स का निर्माण करती हैं। शरीर के सामान्य ढंग से काम करने के लिए इन कोशिकाओं की मौजूदगी आवश्यक होती है। इनकी मौजूदगी में ही ऑक्सीजन परिवहन, संक्रमण और रोगों से बचाव हो पाता है और रक्त का थक्का जमने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

स्टेम सेल्स प्रत्यारोपण में किसी रिश्तेदार या संबंधित दाता की स्टेम सेल्स का ही प्रत्यारोपण किया जाता है लेकिन शहीर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है और उसके परिवार में उसकी स्टेम सेल्स से मेल खाता हुआ कोई दाता नहीं था।

सचदेवा ने कहा, "यह भारत में इस तरह का पहला मामला है जिसमें बेमेल दाता से ली गई स्टेम सेल्स को प्रत्यारोपित किया गया है।"

उन्होंने बताया, "हमने मुंबई स्थित रिलायंस कोर्ड बैंक से संपर्क किया और हमें वहां उपयुक्त स्टेम सेल्स मिल गईं।"

अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि यहां स्टेम सेल प्रत्यारोपण का यह 50वां मामला था। शहीर अब स्वस्थ है लेकिन उसे सप्ताह में दो बार चिकित्सकीय जांच के लिए आना पड़ेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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