संप्रग सरकार की दूसरी पारी, जनता पर पड़ी भारी

नई दिल्ली। बहुमत से सत्ता दोबारा हाथ में लेने वाली संप्रग सरकार के देश एक साल चला लेने के बाद आम जनता अपने आपको बेहद लाचार महसूस कर रही है। देश के आम आदमी के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( संप्रग ) सरकार का पहला साल त्रासदी भरा रहा।

आर्थिक मंदी के चलते भारी मात्रा में रोजगार गंवा चुके लोग महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं। आईएएनएस की ओर से पूरे देश में कराए गए एक नमूना सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि लोगों ने महिला आरक्षण विधेयक और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) नीतियों को सराहा है।

महंगाई से कराह रही है जनता

भोपाल में कार्यरत शिक्षक एएन त्रिपाठी कहते हैं कि उन्होने पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था क्योंकि कांग्रेस पर उन्हे भरोसा था। अब वह कहते हैं कि " आम आदमी की फिक्र कौन करता है। महंगाई आसमान छू रही है।" 24 साल के पेट्रोल पम्प कर्मचारी संतोष कुमार कहते हैं "मैं अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा अपने घर (बिहार) भेज देता हूं। अपने लिए सिर्फ 1500 रुपये रखता हूं। लेकिन 1500 रुपये में अब काम चलाना मुश्किल हो गया है।" कुमार की आमदनी पर उसके परिवार के सात लोग निर्भर हैं।

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रोजगार की तलाश में दिल्ली आने वाले निचले तबके के लोगों के ऊपर महंगाई बेहद कहर ढा रही है। निम्न वर्ग में आने वाली देश की मेहनतकश जनता कि आमदनी आमतौर पर रोजाना के मेहनताने पर निर्भर करती है। इतनी महंगाई में जहां आटा, दाल, चावल जैसी जरूरी चीजों के दाम लगभग दो साल से आसममान छू रहे हैं इस तर ह के लोगों का अपना पेट भरने के अलावा कुछ और सोचना बेहद मुश्किल हो गया है।

एक ओर देश का निम्नवर्गीय भूखे पेट के बोझ तले कुचला जा रहा है वहीं दूसरी ओर देश का मध्यमवर्गीय ज ो किसी तरह पेट भर खाने में सक्षम है, देश की अन्य समस्याओं ने उसका जीना मुहाल कर रखा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की गृहिणी सरोज नेगी कहती हैं "सरकार आम आदमी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है लेकिन महंगाई पर काबू पाने में वह पूरी तरह नाकाम रही है। इस मोर्चे पर उसने आम आदमी को सबसे अधिक प्रभावित किया है।"

मुंबई के सॉफ्टवेयर इंजीनियर हितार्थ बेनानी कहते हैं कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महंगाई पर लगाम कसना आसान नहीं है। वह कहते हैं, "आर्थिक संकट और जलवायु संबंधी समस्याओं से संप्रग सरकार को निपटना है। इसके चलते महंगाई बढ़ी है। आज जो स्थिति हैं, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार होती तो वह पूरी तरह विफल साबित होती।"

कुछ लोग खुश भी हैं

महंगाई और नक्सल समस्या के मुद्दे पर सरकार जहां चौतरफा घिरी दिखाई पड़ रही है वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो संप्रग के प्रदर्शन से खुश भी हैं। खासकर महिला आरक्षण विधेयक और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से।

गुड़गाव की एक गृहिणी यशोदा देवी बताती हैं, "महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक उपयुक्त कदम है। जनसंख्या के आधार पर उन्हें काम करने का भरपूर मौका मिलेगा। धीरे-धीरे महिलाएं पुरूषों से भी आगे निकल जाएंगी।" केरल के कोट्टायम जिले की एक महिला ने बताया, "मनरेगा हमारे लिए वरदान साबित हुआ है। अब हमें काम की तलाश में इधर-उधर भागना-दौड़ना नहीं पड़ता है। यदि कोई काम करना चाहता है तो वह जाकर कर सकता है। इसका समय भी हमारे अनुकूल है।"

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