अंबानी बंधुओं के बीच नया समझौता, सद्भावना का संकल्प लिया (राउंडअप)
नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले दोनों रिलायंस समूहों ने अपने मतभेदों को भुलाकर रविवार को कहा कि उन्होंने एक नया और सरल समझौता किया है, जिससे कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद को जल्द सुलझाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही दोनों समूहों ने भविष्य में सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।
अनिल रिलायंस धीरूभाई अंबानी समूह ने एक बयान में कहा है, "यह समझौता दोनों समूहों के बीच गैर-प्रतिस्पर्धी जिम्मेदारियों की व्याख्या और अवसर से संबंधित मामलों पर किसी अन्य विवाद की संभावना को समाप्त कर देगा।"
समूह ने कहा, "दोनों समूहों के बीच जनवरी 2006 में हुए सभी गैर प्रतिस्पर्धी समझौते अब रद्द हो चुके हैं।" समूह के अनुसार सारा ध्यान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गैस खरीदी समझौते पर शीघ्र वार्ता शुरू करने के लिए दिए गए निर्देश पर था।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्री की ओर से भी इसी तरह का बयान जारी हुआ है।
दोनों समूहों की कंपनियों के बोर्डो ने भी नए समझौते का समर्थन किया है। इसके अनुसार दोनों समूह, किसी भी कारोबार या उद्योग के क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। केवल मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज 12 वर्षो तक गैस आधारित विद्युत उत्पादन नहीं कर सकेगी।
बयान में कहा गया है कि गैर-प्रतिस्पर्धी समझौते के रद्द होने से दोनों समूहों का संचालन और वित्तीय लचीलापन बढ़ेगा तथा तेल, दवा, टेलीकॉम, ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं जैसे बढ़ते क्षेत्रों में भागीदारी की क्षमता बढ़ेगी।
बहरहाल मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड 31 मार्च 2022 तक गैस आधारित विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश न करने पर सहमत हो गई है। लेकिन उसके अधीन गैस विद्युत संयंत्रों को अपवादस्वरूप इस पाबंदी से अलग रखा गया है।
कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस आपूर्ति और उसकी कीमतों पर रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज और रिलायंस इंडस्ट्रीज को फिर से समझौता करने के सर्वोच्च न्यायालय के सात मई के आदेश के बाद रविवार को यह समझौता सामने आया है।
दोनों भाइयों के बीच हुआ समझौता गैस की कीमत, मात्रा और उसकी आपूर्ति से जुड़ा है। इसके अनुसार प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से अगले 17 वर्षो तक रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज को बेची जानी है।
रविवार को हुए समझौते के बाद दोनों समूहों ने कहा कि वे अपने संस्थापक धीरूभाई अंबानी के सपने को साकार करने और भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह को उम्मीद और भरोसा है कि इन कदमों से दोनों समूहों के बीच सद्भाव, सहयोग और एकजुटता का एक व्यापक माहौल तैयार होगा। इससे दोनों समूहों के शेयरधारकों के लिए शेयरों की कीमतें और बढ़ेंगी।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी.सथशिवम की खंडपीठ ने सात मई को दोनों समूहों को बंबई उच्च न्यायालय की कंपनी पीठ के समक्ष छह हफ्तों के भीतर गैस खरीद के बारे में नया समझौता करने को कहा था।
फैसले में यह भी कहा गया था कि दोनों भाइयों के बीच हुआ मूल समझौता गैस आपूर्ति और कीमत के नए समझौते तक पहुंचने के लिए सरकारी दिशानिर्देशों अनुसार एक मार्गदर्शक के तौर पर काम कर सकता है।
आंध्र प्रदेश के तट पर कृष्णा-गोदावरी गैस क्षेत्र अविभाजित रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तब हासिल किया था, जब उसके संस्थापक धीरूभाई अंबानी जीवित थे।
यह क्षेत्र भारत में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है और हाल के वर्षो में एशिया में खोजे गए सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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