छत्तीसगढ़ आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनिच्छुक

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस मुद्दे पर कुछ बोल नहीं रही और बस्तर के महानिरीक्षक (आईजी) टी.जे.लांगकुमेर और दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमरेश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से कोई पत्र मिलने से भी इंकार कर रही है।

एक उच्च पदस्थ सूत्र ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि राज्य सरकार दोनों आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनिच्छुक है और मामले को ठंडे बस्ते में रखेगी। दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से नक्सली प्रभाव वाले इलाके में पुलिस का मनोबल और गिरेगा।

सूत्र ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 62वीं बटालियन के 82 सदस्यों को घने जंगलों में गश्त के लिए भेजने के फैसले में इन दोनों अधिकारियों की अधिक भूमिका नहीं थी।

ई.एन.राममोहन की एक सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के डीआईजी नलिन प्रभात, 62वीं बटालियन के कमांडर वी.के.बिष्ट और इंस्पेक्टर संजीव बागड़ी को हटाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।

अधिकारियों ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक राममोहन ने अपनी रिपोर्ट में कमांड की विफलता की ओर सीधे इशारा किया।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार ने लांगकुमेर और मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से एक पत्र हासिल किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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