मतभेदों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए : मुखर्जी
समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन से मुखर्जी ने कहा, "मेरे विशिष्ट सहयोगी चिदंबरम ने क्या कहा, इस बारे मैं कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता।"
मुखर्जी ने कहा, "मैं कह रहा हूं कि उन्होंने किस संदर्भ में क्या कहा, इस बारे में वह मुझसे बेहतर बताने की स्थिति में हैं। इन चीजों के बारे में हम सार्वजनिक चर्चा नहीं करते, इन चीजों के बारे सार्वजनिक चर्चा भी नहीं की जानी चाहिए.. मैं वैसा व्यक्ति नहीं हूं कि कैबिनेट में लिए गए फैसले से अलग विचार होने पर अपने विचार को सार्वजनिक कर दूं।"
'डेविल्स एडवोकेट' कार्यक्रम के लिए करण थापर को दिए साक्षात्कार में मुखर्जी ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर कैबिनेट में मतभेद के बारे में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। पिछले दिनों एक साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें नक्सलियों से निपटने में 'सीमित अधिकार' प्राप्त हैं। उन्होंने व्यापक अधिकार के लिए सरकारी पैनल के पास जाने की बात कही थी।
मुखर्जी ने कहा, "नहीं, ये ऐसे मुद्दें हैं जिसपर हम कैबिनेट में चर्चा करेंगे, सार्वजनिक बहस नहीं हो सकती, क्योंकि मामले की सच्चाई यह है कि गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकार किया है, उचित कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं, लेकिन किस संदर्भ में गृह मंत्री का ऐसा मानना है, वे ही इसकी व्यख्या करने के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं।"
जब उनसे पूछा गया कि नक्सलियों से निपटने के लिए क्या सरकार गृह मंत्रालय को व्यापक अधिकार देगी तो उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता, जब तक कि हम मंत्रालय से नहीं सुन लेते। विस्तृत अधिकार के तत्व क्या हैं, उसकी सामग्री क्या है, जब इस बारे में चर्चा होगी तभी हम फैसला लेंगे।"
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कैबिनेट मंत्री का अपना विचार होना सामान्य है।
उन्होंने कहा, "इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। किसी भी व्यावसायिक संस्था की तरह, फैसला लेने की प्रक्रिया में विभिन्न लोगों से विभिन्न जानकारियां हासिल होती हैं, लेकिन जब एक बार फैसला ले लिया जाता है तो सभी उस फैसले का पालन करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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