पान की खेती पर अब गर्मी की मार

भोपाल, 21 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पान किसानों का हाल 'दूबरे और ऊपर से दो आषाढ़' जैसा है। पहले बरसात और ठंड ने पान की फसल को नुकसान पहुंचाया और अब रही सही कसर बढ़ती गर्मी के बीच चलती लू पूरी कर रही है। आलम यह है कि लगभग 60 से 70 फीसदी तक पान की खेती चौपट होने के करीब पहुंच गई है।

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और ग्वालियर-चम्बल के कुछ इलाकों के पान की देश ही नहीं विदेशों में भी धाक रही है। यही कारण है कि यहां का पान पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अरब देशों तक जाता है लेकिन पान की कम पैदावार के चलते उसकी पहचान ही संकट में पड़ती जा रही है।

बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के महाराजपुर, गढ़ीमलहरा, पिपट, पनागर, बारीगढ़, गुलगंज के अलावा टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ और ग्वालियर के बिलौआ, आंतरी, बरई आदि की पहचान पान की खेती के रही है। पहले भारी बारिश फिर कड़ाके की ठंड और अब गर्मी ने लगातार इस कारोबार पर गहरे आघात किए हैं।

ग्वालियर के किसान नेता राम बाबू जाटव बताते हैं कि अधिकतम तापमान में वृद्धि और उसके साथ चल रही लू ने पान के पत्तों को ही नहीं उसके डंठल तक को झुलसा दिया है। इसके चलते पान की पैदावार काफी कम होने के आसार बन गए हैं। जाटव के अनुसार यही हाल रहा तो सब्जियों की पैदावार तक कम हो जाएगी।

बिलौआ के रहने वाले जितेंद्र आर्य के मुताबिक पान की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। इसका मुख्य कारण पान किसानों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन न मिल पाना है। लंबे अरसे से इस इलाके में पान अनुसंधान केंद्र खोलने की मांग हो रही है, मगर उसे सुनने वाला कोई नहीं है।

वह सरकार के रवैए से भी खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि पान की खेती में एक पारी (कतार) बनाने में 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है और फसल के चौपट होने पर मुआवजा महज 200-300 रुपये ही दिया जाता है। अनुमान के मुताबिक पान की खेती मौसम की बेरूखी के चलते 60 से 70 प्रतिशत तक चौपट होने के आसार बन गए हैं।

किसानों को परामर्श देने के लिए भोपाल में स्थापित किए गए किसान कॉल सेंटर के प्रभारी सुरेश मोटवानी का कहना है कि तापमान में हुए इजाफे का असर फसल पर पड़ा है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। वह बताते हैं कि गेंहू की जो फसल जल्दी बोई गई थी, उसका दाना तो ठीक रहा है मगर जो देर से बोई गई थी वह तापमान बढ़ने से जल्दी पक गई और दाना पूरी तरह पुष्ट नही हुआ।

मोटवानी का कहना है कि तापमान के बढ़ने का नुकसान है तो कुछ लाभ भी है। तापमान में हुए इजाफे के अनुसार ठंड में भी तापमान दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने के आसार हैं। ऐसे में फसलों को पाला आदि लगने के आसार कम रहेंगे। साथ में किसानों को बढ़ते तापमान के अनुसार फसल बोने का कार्य करना होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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