भीषण गर्मी से कारोबार और उद्योग प्रभावित
प्रदेश के अधिकांश इलाकों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज हो रहा है। झुलसा देने वाली तपिश और लू के कहर से लोग सुबह 10 से शाम को सूरज ढलने तक घरों में दुबके बैठे रहते हैं। जिन बाजारों की सड़कों पर दिनभर खरीददारों की भीड़ लगी रहती थी वहां सन्नाटा पसरा रहने लगा है। इसका सीधा आसार कारोबार पर पड़ रहा है।
लखनऊ की मशहूर जनपथ मार्केट में कपड़े का शोरूम चलाने वाले दीपक गोयल कहते हैं कि इस भीषण गर्मी ने बिक्री पर बुरा असर डाला है। सारा दिन खाली बैठकर ग्राहकों की राह देखा करते हैं। आजकल केवल शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक ही दुकानदारी होती है।
सड़कें सूनी रहने से ऑटो और रिक्शेवालों को सवारियों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। चार बाग रेलवे स्टेशन से गोमतीनगर के बीच ऑटो चलाने वाले कुंदन कुमार कहते हैं कि बढ़ते तापमान के चलते लोग घरों में दुबके बैठे रहते हैं। सारा धंधा ठंडा पड़ गया है। आजकल सीएनजी गैस की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
चिलचिलाती गर्मी का असर औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। लखनऊ के औद्योगिक इलाके में स्थित प्लास्टिक उद्योग से जुड़े विक्रम कपूर कहते हैं कि बढ़ते तापमान का उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। थोड़ी-थोड़ी देर में पसीने से लथपथ कर्मचारी काम छोड़कर बैठ जाते हैं। श्रमिकों की कार्यक्षमता घटने के कारण उत्पादन में औसतन 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। वहीं सभी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खर्च पहले जैसे ही हैं। उल्टा बिजली की खपत बढ़ गयी है और उत्पादन कम हो रहा है। इस कारण लागत बढ़ रही है।
श्रमिक बुधई कहते हैं कि 40 साल की उम्र हो गई है लेकिन अप्रैल-मई के महीने में इतनी भयंकर गर्मी कभी नहीं देखी। आमतौर पर पूरे मौसम में सात-आठ दिन ही ज्यादा गर्मी पड़ती थी, लेकिन इस बार तो यह अंतराल काफी लंबा हो गया है। गर्मी के चलते मशीनों पर काम करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
दिन भर सुनसान रहने वाले बाजारों में सूरज ढलने के बाद ही रौनक देखने को मिलती है। कपूरथला इलाके की आइसक्रीम की दुकान करने वाले मानू मखीजा कहते हैं कि आजकल सारी बिक्री शाम के समय ही होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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