बैंकाक में पटरी पर लौटने लगी जिंदगी
शहर के इरावान आपात केंद्र ने बताया कि 159 लोग अभी तक अस्पताल में हैं जिनमें से 15 को आईसीयू में रखा गया है।
बैंकाक में बुधवार को हिंसा चरम पर पहुंच गई थी जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई में 15 लोग मारे गए थे और 103 घायल हो गए थे।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि बुधवार से दंगाइयों द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की 300 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं। आगजनी की घटनाओं में 36 इमारते नष्ट कर दी गई हैं या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है।
यहां रात नौ बजे से सुबह पांच बजे का कर्फ्यू कम से कम रविवार तक लगा रहेगा और स्काईट्रेन और सबवे ट्रांजिट सिस्टम बंद रहेंगे। सरकारी कार्यालय सोमवार तक बंद रहेंगे।
शहर के मध्य हिस्से से अलग किए गए और सुरक्षा बलों तथा दंगाइयों के बीच जबरदस्त झड़पों का केंद्र रहे रामा फोर रोड के हिस्से पर शुक्रवार को भी जले हुए टायर, मलबा और बहुत सी दुकानों के अवशेष दिखाई दे रहे थे।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि राचापरासांग क्षेत्र को जनता के लिए खोलने में कम से कम एक या दो दिन का समय लगेगा। इसी जगह शहर के सबसे ज्यादा आलीशान होटल और शॉपिंग मॉल हैं।
बैंकाक पोस्ट वेबसाइट ने लेफ्टिनेंट जनरल दापोंग रात्तनासुवान के हवाले से कहा है कि गुरुवार को वहां दाखिल होने वाले अधिकारियों ने देखा कि फोर सीजंस होटल में गैस टैंक्स को छुपाकर रखा गया था। उसे विस्फोट के लिए बिल्कुल तैयार स्थिति में रखा गया था।
प्रदर्शनकारियों ने थाईलैंड के शीर्ष अधिकारी वर्ग से जुड़े डिपार्टमेंटल स्टोर, बैंकों और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं को भी निशाना बनाया था। प्रदर्शनकारियों ने बैंकाक बैंक की 10 शाखाओं की इमारतों को भी आग के हवाले कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा संसद को भंग कर नए चुनाव कराएं। जब वह तीन मई को आगामी 14 नवंबर को चुनाव कराने पर राजी हो गए थे, प्रदर्शनकारियों ने नई मांगें रख दी थीं और आखिरकार वेज्जाजीवा ने शांति प्रस्ताव वापस ले लिया था।
सरकार के अनुसार सेना द्वारा वर्ष 2006 में सत्ता से बेदखल किए गए भगोड़े पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा प्रदर्शनकारियों को राजनीतिक और वित्तीय समर्थन हासिल था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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