गर्मी से आम और दलहन का उत्पादन प्रभावित
उत्तर प्रदेश का मलिहाबाद देशभर में आम की किस्मों और उत्पादन के लिए जाना जाता है। अप्रैल से ही चलने वाली गर्म हवाओं ने महिलाबाद और प्रदेश के दूसरे जिलों में आम की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
कृषि वैज्ञानिक के.बी.त्रिपाठी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा,"शुरुआत में आम की जोरदार फसल थी, लेकिन भीषण गर्मी के चलते और नमी कम होने से आम का एक बड़ा हिस्सा सूखकर पेड़ से गिर गए।"
उत्तर प्रदेश में इस साल करीब 3 लाख टन आम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन गर्मी से तकरीबन 25 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।
महिलाबाद के आम उत्पादक मोहम्मद अहसान ने बताया, "पिछले साल आम की फसल(बौर) आने के सापेक्ष उत्पादन आशाजनक हुआ था। इस साल अच्छी फसल आई थी, पर भीषण गर्मी और लू से आम सूख गया। इसके अलावा इस साल समय से पहले ही पेड़ पर आम पकने लगे। आम तौर पर आम 20 मई के बाद पकने शुरू होते हैं।"
कृषि वैज्ञानिक आर.के.राठौर ने बताया, "गर्मी ने आम उत्पादकों के साथ-साथ दलहन और सब्जियों की खेती करने वाले किसानोंे को भी जोर का झ्झटका दिया है।"
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी पड़ने के कारण कद्दू, लौकी, करैला, भिंडी और तरोई जैसी सब्जियों के फूल झ्झुलस गए और उनमें परागण नहीं हो पाया, जिससे उनमें फल नहीं आए। उत्पादन कम होने से बाजार में ये सब्जियां महंगी बिक रही हैं।
इसी तरह जायद की प्रमुख फसलों उड़द, मूंग और मक्का के फूल भी गर्मी और लू के प्रभाव से झ्झुलस कर झ्झड़ गये। उन्होंने कहा कि बीच में एक-दो बार बारिश जरूर हुई लेकिन उससे खेतों में ज्यादा दिन तक नमी रह पाई।
उधर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक मुकेश गौतम ने आईएएनएस से कहा, "राज्य के जिन इलाकों में सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं, वहां पर जायद की फसल पर गर्मी का खास असर नहींे पड़ा है। उन्होंने माना कि जायद की फसल के निर्धारित लक्ष्य पाना थोड़ा मुशकिल होगा।"
इस दौरान गौतम ने इस बात से इंकार किया कि गर्मी ने गेंहू की फसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी शुरू होने के पहले ही राज्य में गेहूं की फसल की कटाई-मड़ाई समय पर हो चुकी थी। कुछ इलाकों में जहां पर देर से फसल की कटाई हुई वहां पर मामूली असर पड़ा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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