विवादों से सूर्खियों में रहे सोरेन

रांची, 19 मई (आईएएनएस)। झारखण्ड के मुख्यमंत्री व झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन अक्सर सूर्खियों में रहे हैं, लेकिन विवादास्पद कारणों से।

उनके आलोचक उन्हें एक जटिल सौदेबाज और एक अबूझ राजनेता मानते हैं, जोकि संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल अपने हित में करते हैं।

जुलाई 2004 में सोरेन केंद्रीय कोयला मंत्री थे। उस समय तीन दशक पुराने एक नरसंहार के मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। सोरेन गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत हो गए थे। इससे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कथित रूप से शर्मसार होना पड़ा था।

सोरेन संभवत: देश के एक मात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जो बगैर विधायक बने किसी राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई व्यक्ति विधायक न होते हुए भी मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन छह महीने के भीतर उसे राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी पड़ती है।

झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रित (जेवीएम-पी) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है, "सोरेन ने संविधान का मजाक उड़ाया है। वह विधायक न रहते हुए भी तीन बार मुख्यमंत्री बने।"

मरांडी ने विधानसभा का सदस्य न रहते हुए भी झारखण्ड के मुख्यमंत्री पद पर सोरेन के बने रहने को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

सोरेन पहली बार मार्च 2005 में मुख्यमंत्री बने थे। जबकि सच्चाई यह थी कि उनके पास विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं थी। उस समय वे केंद्रीय कोयला मंत्री थे और लोकसभा सांसद थे। सदन में बहुमत साबित करने में विफल होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

वह अगस्त 2008 में दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। उस समय सोरेन लोकसभा सांसद थे और जनवरी 2009 में तामड़ विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में पराजित हो गए थे। परिणामस्वरूप उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मुख्यमंत्री के रूप में सोरेन के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत पिछले वर्ष 30 दिसंबर से हुई। अब भी वह राज्य विधानसभा के सदस्य नहीं हैं।

राज्य में शुरू हुए राजनीतिक संकट के बीच अभी वह विधानसभा चुनाव लड़ने के बारे में कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं। राजनीतिक संकट 27 अप्रैल को उस समय शुरू हुआ, जब सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा लोकसभा में सरकार के खिलाफ लाए गए कटौती प्रस्ताव पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के पक्ष में वोट दिया।

भाजपा ने सोरेन की इस हरकत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए झारखण्ड में उनकी सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी।

झामुमो और भाजपा के बीच 28-28 महीने राज्य में शासन करने को लेकर मंगलवार को हुए समझौते के तत्काल बाद सोरेन ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की घोषणा की।

भाजपा नेताओं के अनुसार पार्टी महासचिव और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा नई सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं। सोरेन 25 मई को इस्तीफा देंगे।

कांग्रेस की झारखण्ड इकाई के महासचिव शैलेश सिन्हा ने आईएएनएस से कहा, "संवैधानिक प्रावधानों को स्वहित में इस्तेमाल करने के लिए इतिहास सोरेन को याद रखेगा। संवैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग का यह सबसे बुरा उदाहरण है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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