दिल्ली हवाईअड्डे के नए टर्मिनल पर तेजी से होगा चेक-इन
'कॉमन यूज पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम' यानी 'कप्स' नामक इस तंत्र के शुरू होने से यातायात कंपनियों को हवाईअड्डे पर जांच काउंटर बनाने और यात्रियों को व्यवस्थित करने की जरूरत नहीं रहेगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस तंत्र के कारण हवाईअड्डा प्रशासन को यात्रियों की तेज प्रवेश जांच, सुव्यवस्थित आवागमन और बोर्डिग पास देने में काफी कम समय लगेगा।
दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा लिमिटेड (डीआईएएल) ने कहा, "कप्स सभी एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने में मदद करेगा। यात्रियों को प्रवेश जांच में कम समय लगने से काफी फायदा होगा।"
कंपनी ने कहा कि टर्मिनल-3 (टी-3) पर 173 कप्स काउंटर बनाए जा रहे हैं। ये सभी घरेलू और विदेशी दोनों तरह की वायुसेवाओं के लिए समान हैं। इसके अलावा 20 अन्य कप्स काउंटर मैटो लाइन के जरिए हवाईअड्डा पहुंचने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा, "हम अक्टूबर में राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने से पहले नए टर्मिनल का परीक्षण कर लेना चाहते हैं ताकि मेहनानों के आगमन पर उन्हें यहां बेहतर अनुभव हो।"
कप्स सिस्टम, हार्डवेयर और साफ्टवेयर का सम्मिलित तंत्र है जो हवाईअड्डे की सभी जानकारियां एकत्रित करता रहता है। यह टिकिट आरक्षण से लेकर, उड़ान के समय और वेटिंग लॉन्ज की क्षमता का लगातार आकलन करता रहता है।
इससे पहले वायु सेवा कंपनियों को एयरपोर्ट पर अपना एक अलग काउंटर खोलने की जरूरत पड़ती थी लेकिन कप्स सिस्टम की वजह से उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
करीब 52 लाख वर्ग फीट में बना यह नया टर्मिनल विश्व के सबसे बड़े टमिनलों में से एक है। अधिकारियों के मुताबिक नए टर्मिनल में 80 बोर्डिग गेट और 240 प्रवेश केंद्र बने हैं। यहां 63 एलीवेटर, 34 एस्क्लेटर, 92 स्वचलित पथ, और 78 एयरोब्रिज बनाए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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