नक्सली हड़ताल से झारखण्ड में बस, रेल सेवाएं बाधित
पुलिस के अनुसार बंद का सर्वाधिक असर ग्रामीण इलाकों में हुआ। इन क्षेत्रों में सड़कें सूनी हैं, दुकानें बंद हैं और अधिकांश स्कूलों में उपस्थिति बहुत कम है। हजारों बसें और ट्रक सड़कों के किनारे खड़े रहे।
ट्रक और बस एसोसिएशन के अनुसार नक्सली हड़ताल के कारण झारखण्ड में दो दिनों में 60-70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
झारखण्ड पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "नक्सलियों का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण इलाकों में नजर आ रहा है। शहरी इलाकों में कोई प्रभाव नहीं है। हड़ताल से सबसे अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं।"
पुलिस ने कहा कि नक्सलियों ने सिमडेगा जिले में एक ट्रक चालक को गोली मार दी। उसे एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रेलवे अधिकारियों ने एहतियाती उपाय के तौर पर आठ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया और नौ के मार्ग में बदलाव किया।
खनन गतिविधियों के साथ ही कोयले, लौह अयस्क और बाक्साइट का परिवहन भी प्रभावित हुआ।
राज्य के गिरीडीह, लातेहार,पलामू और सिमडेगा जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए।
प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (भाकपा-माओवादी) की दो दिवसीय हड़ताल मंगलवार को शुरू हुई थी।
नक्सलियों ने ऑपरेशन ग्रीन हंट और पश्चिम बंगाल में नक्सली नेता सोमा मार्डी की गिरफ्तारी के विरोध में पांच राज्यों- बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में बंद का आह्वान किया था।
नक्सलियों का कहना है कि पुलिस ने सोमा मार्डी को गिरफ्तार किया है और उनको न्यायालय में पेश नहीं कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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