भगदड़ के दूसरे दिन भी अपनों की तलाश जारी
शिखा दत्ता (27) ने आंसू भरी आंखों से कहा, "मेरा फोन कहीं गुम हो गया। मैं अपने पति को अभी नहीं पा सकी हूं। मैं यहां बैठ कर उनका इंतजार कर रही हूं।"
पटना के दिहाड़ी मजदूर राकेश कुमार स्टेशन के बाहर बैठे हताश बैठे हैं।
कुमार ने कहा, "इस अफरातफरी में मेरा सामान गायब हो गया। मेरा टिकट, मेरा फोन सबकुछ गायब हो गया। आखिर मैं मदद के लिए किसके पास जाऊं?"
ज्ञात हो कि रविवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ उस समय मची, जब बिहार जाने वाली दो रेलगाड़ियों, नई दिल्ली-भागलपुर विक्रमशिला एक्सप्रेस और नई दिल्ली-मुजफ्फरपुर सप्त क्रांति एक्सप्रेस, क्रमश: अपराह्न् 2.40 बजे और 2.45 बजे प्रस्थान करने वाली थीं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सोमवार को कहा कि इसके लिए रेल मंत्रालय जवाबदेह है।
दीक्षित ने संवाददाताओं से कहा, "यह रेल मंत्रालय को पता लगाना है कि स्टेशन पर क्या गलती हुई और इसे कैसे रोका जा सकता था।"
एक अन्य यात्री ने नाराजगी के साथ सवाल किया कि आखिर यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए कुछ रेलगाड़ियां आनंद विहार स्टेशन पर क्यों नहीं स्थानांतरित कर दी जातीं, जो कि पिछले पांच महीने से तैयार पड़ा है।
अपना सामान और पैसा गंवा चुके बाबू लाल मिश्रा (53) ने कहा, "केवल सात नियमित रेलगाड़ियां और कुछ गर्मी की विशेष रेलगाड़ियां ही आनंद विहार से जा रही हैं। आखिर इन असमय मौतों को रोकने के लिए सरकार कब चेतेगी? रेल मंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में बैठी हु़ई हैं और मुआवजा देने का दावा कर रही हैं। वह भी आखिर कब पहुंचेगा? उन्हें यहां आकर देखना चाहिए था कि हमारे साथ क्या कुछ गुजरा। हम किस हालात में हैं।"
इस बीच ऐहतियात के रूप में रेल प्रशासन ने सोमवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म टिकट बेचना बंद कर दिया।
रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, "यह कदम प्लेटफार्म पर भीड़ कम करने के लिए उठाया गया है। रविवार की घटना के बाद हम नहीं चाहते कि इस तरह की घटना दोबारा घटे। केवल बूढ़े व बच्चों को ही प्लेटफार्म टिकट दिया जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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