मलेशिया, भारत और रूस के सहयोग की कहानी है सुखोई
गोंग केडक (मलेशिया), 17 मई (आईएएनएस)। सुखोई विमानों के संचालन, रखरखाव और इसकी उड़ानों की कहानी दरअसल मलेशिया, भारत और रूस के सहयोग की कहानी है। मलेशिया के एक वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी सुखोई विमान को कुछ इसी तरह याद करते हैं।
मलेशिया, भारत और रूस के बीच वायुसेना सहयोग के लिए शुरू की गई तीन वर्षीय त्रिपक्षीय व्यवस्था अब अंतिम दौर में चल रही है। रूस और भारत सुखोई विमानों के रखरखाव व प्रशिक्षण के जरिए मलेशिया की वायुसेना को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मलेशिया की जरूरत को देखते हुए भारत और रूस के अधिकारियों ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
रूस के विमान निर्माता इरकुट कोऑपरेशन के प्रमुख व्लादीमीर कोनोव और भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्ध निर्देशक समूह के कप्तान के. वी. आर राजू ने यह आश्वासन दिया है।
कोनोव मानते हैं कि इस सहयोग को अभी कुछ समय तक और जारी रखने की जरूरत है।
'न्यू स्ट्रेट टाइम्स' समाचार पत्र के मुताबिक रायल मलेशियन वायुसेना की 11वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद असगर खान कहते हैं कि सहयोग की यह दास्तान 1994 में 1.3 अरब आरएम की लागत से 18 मिग 29एन विमानों की खरीद से शुरू हुई थी और सुखोई-30 एमकेएम की खरीद के बाद यह सहयोग अपने उत्कर्ष पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि हम इस महत्वपूर्ण गठजोड़ को लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं, अपनी वायु सैनिक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए भारत और रूस का सहयोग बनाए रखना चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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