भारत ने चीनी संचार कंपनी से मालिकाना विवरण मांगा (राउंडअप)
केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "जेडटीई के एक प्रतिनिधि से बैठक के दौरान गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने कंपनी से मालिकाना विवरण और अन्य अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं।"
अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने 15 दिनों के भीतर सरकार को संबंधित विवरण मुहैया कराने का वादा किया है।
जेडटीई इंडिया चीनी संचार उपकरण निर्माता कंपनी जेडटीई की पूर्व स्वामित्व वाली कंपनी है।
इससे पहले संचार उपकरणों के निर्यात के मुद्दे पर चर्चा के लिए नई दिल्ली में चीन के राजदूत जांग यान ने भी गुरुवार को केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै से मुलाकात की। दोनों के बीच 45 मिनट से ज्यादा समय तक बातचीत हुई।
नॉर्थ ब्लॉक स्थित पिल्लै के कार्यालय में हुई बैठक के बाद जांग ने कहा, "हमने उपयोगी बातचीत की। उम्मीद है कि सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा।"
जेडटीई इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डी. के. घोष ने संवाददाताओं से कहा, "हमने भारत सरकार से अपील की है। हमने अपने विचारों को रखा है। अब देखना है कि सरकार क्या निर्णय लेती है।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह खुश हैं तो उन्होंने कहा कि बैठक एक सकारात्मक माहौल में हुई।
भारत में चीनी संचार उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध के सवाल पर उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई औपचारिक सूचना नहीं है लेकिन हमें संचार सेवा प्रदाता कंपनियों से पता चला है कि जेडटीई समेत कुछ कंपनियां सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरतीं।"
घोष ने कहा, "भारत सरकार को हमारा पूरा सहयोग है। हम उनकी सुरक्षा चिंताओं को अच्छी तरह समझते हैं। हम सरकार के सुरक्षा मानकों, नीतियों और जरूरतों का पालन करेंगे।"
हरियाणा के मानेसर में जेटीई इंडिया की निर्माण इकाई है। मुख्य रूप से यहां उपकरणों की मरम्मत का काम होता है। कंपनी चीन से उपकरण और मोबाइल फोन का आयात करती है।
गुड़गांव में कंपनी का मुख्य कार्यालय है जहां दो अभियांत्रिकी केंद्र, एक अनुसंधान केंद्र और एक विकास केंद्र है।
चीनी उपकरण अमेरिका और यूरोपीय कंपनियों के उपकरणों से सस्ते होते हैं। भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, वोडाफोन और सार्वजनिक क्षेत्र की महानगर टेलीफोन नगर लिमिटेड जैसी सभी संचार कंपनियां जेडटीई सहित कई चीनी कंपनियों से उपकरण आयात करती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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