कसाब के मृत्युदंड की पुष्टि में 8 महीने (लीड-1)

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। मुंबई हमले के दौरान जिंदा पकड़े गए एक मात्र पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब को विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि करने में बंबई उच्च न्यायालय को 253 दिन (आठ महीने, 13 दिन) लग सकते हैं।

खासतौर से पिछले 17 सालों में बंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सैकड़ों फैसलों के अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है कि प्रत्येक मामले को निपटाने में औसतन 253 दिन लगते हैं।

प्रवधान के मुताबिक किसी सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई प्रत्येक फांसी की सजा की राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि की जाती है।

राज्य सरकार को सजा की पुष्टि के लिए औपचारिक रूप से उच्च न्यायालय से संपर्क करना पड़ता है।

अन्य वकीलों की मदद से इस अध्ययन को अंजाम देने वाले अधिवक्ता के.वी.धनंजय के अनुसार, "बंबई उच्च न्यायालय ने 52 प्रतिशत मामलों में मौत की सजा को निरस्त कर दिया है और मात्र 48 प्रतिशत सजा की ही पुष्टि की है।"

सर्वोच्च न्यायालय के वकील धनंजय ने आईएएनएस से कहा, "इस सच्चाई के मद्देनजर कि कसाब को अलग-अलग चार मामलों में मृत्युदंड दिया गया है, इस बात की संभावना न के बराबर बनती है कि उच्च न्यायालय सभी चारों सजाओं को निरस्त कर देगा। अदालत कम से कम फांसी की दो सजाओं की पुष्टि तो कर ही सकता है।"

धनंजय ने कहा, "इस बात की अधिक संभावना है कि बंबई उच्च न्यायालय कुछ समय के लिए (आमतौर पर आठ सप्ताह) मृत्युदंड की पुष्टि के मामले को स्थगित कर दे, ताकि दोषी व्यक्ति संविधान की धारा 136 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सके।"

यदि कसाब इस सजा के खिलाफ अपील करता है तो बंबई उच्च न्यायालय अलग-अलग निष्कर्षो से बचने के लिए दोनों मामलों को एक साथ नत्थी कर देगा। पहला मामला मौत की सजा की पुष्टि का होगा और दूसरा कसाब द्वारा की गई अपील का।

धनंजय ने कहा, "बंबई उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि संबंधी किसी मामले को निपटाने में लगे सबसे कम समय का रिकार्ड 76 दिनों का है और सबसे अधिक समय का रिकार्ड 469 दिनों का है। यदि कसाब के मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर भी की गई तो भी चार अलग-अलग मामलों की पुष्टि के लिए 253 दिन काफी कम लगते हैं।"

यदि कसाब ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की और उसके बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की तो उसे फांसी पर लटकाए जाने के रास्ते में एक दूसरा अवरोध खड़ा हो सकता है।

धनंजय ने कहा, "प्रत्येक मौत की सजा के मामले में राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने की जरूरत होती है। यदि कसाब राष्ट्रपति से माफी की इच्छा रखता है तो उसे चार अलग-अलग दया याचिकाएं दायर करने की जरूरत होगी।"

ज्ञात हो कि कसाब को पिछले गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे 26-29 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के लिए दोषी ठहराया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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