कसाब को सज़ा-ए-मौत

नवंबर मुंबई हमले के मामले में पकड़े गए चरमपंथी अजमल आमिर कसाब को गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने मृत्युदंड की सज़ा सुनाई है.
मुंबई पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त हिमांशु राय ने अदालत से बाहर निकलकर पत्रकारों के बताया कि कसाब को चार मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई है.
हिमांशु रॉय ने कहा, "कसाब को हत्या, हत्या की साज़िश, भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने और आपराधिक गतिविधि निरोधक क़ानून के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई है."
कसाब पर 86 आरोप लगाए गए थे और उन्हें तीन मई को अधिकतर मामलों में दोषी पाया गया था. दोषी साबित किए जाने के बाद कसाब की सज़ा पर बहस हुई.
मुंबई में 26 नवंबर 2008 की रात को 10 बंदुकधारियों ने शहर के दो होटलों, छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर हमला किया था. नौ हमलावर मारे गए थे लेकिन अजमल कसाब को पुलिस ने जीवित पकड़ लिया था.
ये हमले 29 नवंबर तक जारी रहे थे और इस दौरान 170 से ज़्यादा लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए थे.
मुंबई हमलों के अन्य दो अभियुक्त फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन को मुंबई की ये विशेष अदालत पहले ही बरी कर चुकी है.
अदालत
अदालत से बाहर आकर अभिनयोजन पक्ष के वकील उज्जवल निकम ने मीडिया को फ़ैसले की जानकारी दी.
निकम ने कहा, "ये केस हमारे लिए एक चुनौती थी. हमने दुनिया के सबसे लोकतंत्र में एक गरिमामयी मुक़दमा चलाया और आज दुनिया के सामने एक मिसाल रखी है."
उन्होंने कहा, “पिछले साल आठ मई को इस केस का पहला गवाह पेश किया गया था. और एक साल के भीतर ही हमने 600 गवाहों की पेशी करके ये मुकदमा समाप्त कर दिया. फिर भी कुछ लोगों ने इस केस को धीमा कहकर इस दाग़ लगाने की कोशिश की”
निकम ने कहा कि वो अदालत के फ़ैसले से ख़ुश हैं, "मैं ख़ुश इसलिए हूं कि 1993 के बाद आज मेरी भी ऑर्थर रोड जेल रिहाई हो गई है. क्योंकि 93 के मुंबई धमाकों और अबु सलेम का केस मैंने इसी जेल में लड़ा. उसके बाद कसाब का केस भी यहीं से शुरु हुआ












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