26/11 के 18 माह बाद कसाब को सजा-ए-मौत (राउंडअप)
विशेष अदालत ने कसाब को चार मामलों -देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, हत्या, षड्यंत्र रचने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने-में मौत की सजा सुनाते हुए पांच अन्य मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कसाब को कुल 86 मामलों में दोषी करार दिया गया है।
सात महीनों के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करते हुए विशेष अदालत के न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानि ने फैसला सुनाते हुए कहा, "मौत होने तक उसे फांसी पर लटकाया जाए।"
उन्होंने कहा कि यदि कसाब को जीवित छोड़ा जाएगा तो आम आदमी का अदालत से भरोसा उठ जाएगा। उसे जीने का अधिकार नहीं है। "मौत की सजा आवश्यक है।"
न्यायाधीश ने कहा, "निश्चित तौर पर सजा अपराध के अनुरूप होनी चाहिए, यदि ऐसा नहीं होता है तो यह न्याय का मजाक होगा और आम आदमी का विश्वास उठ जाएगा।"
अदालत में सन्नाटे के बीच ताहिलयानि ने कसाब से कहा, "आपको गले से दम निकलने तक फांसी से लटकाया जाएगा।"
अदालत ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य 23 वर्षीय कसाब को सोमवार को दोषी करार दिया था। दो अन्य आरोपियों फहीम और सबाउद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।
लश्कर के सरगनाओं के दबाव में कसाब द्वारा ऐसा कृत्य किए जाने के बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि कसाब ने खुद लश्कर का दरवाजा खटखटाया था और वह भारत पर हमला करने को लेकर व्यग्र था।
फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील जे. पी. अग्रवार ने कहा, "मैं कुछ भी कहना नहीं चाहता।"
आर्थर रोड जेल में बनी विशेष अदालत से बाहर आते हुए मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त हिमांशु राय ने कहा कि मामले की बेहतरीन जांच और ठोस सबूत जुटाने के लिए विशेष न्यायाधीश ने पुलिस की पूरी जांच टीम को बधाई दी है।
फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने जब कसाब से पूछा कि उसे कुछ कहना है तो वह दोनों हाथ जोड़कर चुपचाप खड़ा हो गया। इससे पता चलता है कि उसे फैसला स्वीकार है।
फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायाधीश ने कसाब से कहा कि यदि वह पानी पीना चाहता है तो कुछ समय के लिए वह कटघरे से बाहर जा सकता है। न्यायाधीश ने मीडियाकर्मियों से भी कहा कि वे कक्ष से बाहर न जाएं।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कसाब सिर झुकाए हुए था। न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के वकील से भी कहा कि क्या कसाब कुछ कहना चाहता है। इस पर कसाब ने अपना सिर हिलाकर न में जवाब दिया।
अभियोजन पक्ष के विशेष वकील उज्जवल निकम ने संवाददाताओं से कहा कि कसाब को चार मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई है।
फैसले के बाद निकम बेहद खुश थे। उनकी इस खुशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब वह कैमरों के सामने पहुंचें तो अपनी विजयी मुस्कान नहीं छिपा सके और 'विक्टरी' के संकेतों से उन्होंने इसका प्रदर्शन भी किया।
निकम ने कहा, "फैसले से मैं बहुत खुश हूं क्योंकि पीड़ितों के घाव भरने की मेरी कोशिश सफल हुई है। परिवारों के आंसू पोंछने का काम हमारी पुलिस और अभियोजक एजेंसियों ने किया है।"
फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि 26/11 के मुंबई हमलों के मामले में कसाब को उसकी स्वीकारोक्ति के आधार पर नहीं बल्कि सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया है।
गृह मंत्रालय के कामकाज पर एक चर्चा के दौरान राज्यसभा में उन्होंने कहा, "कसाब को अपराध स्वीकार करने के आधार पर नहीं बल्कि उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया।"
चिदंबरम ने कहा, "हमारे पर न केवल मौखिक सबूत थे बल्कि काफी मेहनत से जुटाए गए ठोस सबूत थे। हमने कराची से मुंबई पहुंचे सभी 10 आतंकवादियों के रास्तों को स्पष्ट किया। हमले के दौरान आतंकवादियों के बीच मोबाइल फोन पर हुई बातचीत के सबूत इकट्ठा करने में हम कामयाब रहे।"
मुकदमे की सुनवाई के बारे में उन्होंने कहा, "हमने कोई गुआंटानामो बे (क्यूबा में स्थित अमेरिकी जेल) नहीं बनाया। हमने सैन्य अदालत का गठन नहीं किया। मुकदमे की सुनवाई सामान्य सिविल अदालत में हुई। केवल न्यायाधीश को विशेष न्यायाधीश का दर्जा दिया गया।"
संसद के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कहा, "मेरा मानना है कि न्याय एक उपयुक्त निष्कर्ष पर पहुंचा। पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया का पालन हुआ। ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को हमें सबक सिखाना चाहिए।"
कृष्णा ने कहा, "इस मामले में शामिल अन्य अभियुक्तों को और अन्य सह-साजिशकर्ताओं को भी न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।"
उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर, 2008 की रात पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर हमला बोला था। लगभग 60 घंटे तक इन आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच चले संघर्ष में 166 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 244 घायल हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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