सुप्रीम कोर्ट - नार्को टेस्ट 'उसी का जो राजी हो'

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अदालत कके मुताबिक बलपूर्वक ऐसे परीक्षण संविधान की धारा 20(3) का उल्लंघन है। इस धारा के तहत किसी भी मामले में किसी भी व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाही देने को विवश नहीं किया जा सकता। इस फैसले में यह भी कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति खुद को निरपराध साबित करने के लिए स्वैच्छा से नार्को, पोलीग्राफ या ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराता है, तो इस परिस्थिति में भी मानवाधिकार आयोग की नियमावली का पालन किया जाना चाहिए।
बालाकृष्णन ने कहा कि ऐसे परीक्षणों के दौरान आरोपी द्वारा अपराध की स्वीकारोक्ति अदालतों में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होगी। अंडरवर्ल्ड की दुनिया में गॉडमदर के नाम से मशूहर संतोकबेन जडेजा और माफिया सरगना अरुण गवली ने इन परीक्षणों की वैधता को चुनौती दी थी। दोनों की याचिकाओं पर न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।












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