हर महीने 500 लड़कियों की तस्करी होती है

बेचने के आधार
अनन्या को महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी पर बने 89 मिनट की अवधि के वृत्तचित्र 'अंडरस्टेंडिंग ट्रैफिकिंग" के लिए 'युनाइटेड नेशंस पापुलेशन फंड" (यूएनएफपीए) का 'लाडली" पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील 11 मई को राजधानी में उन्हें यह पुरस्कार देंगी। अनन्या मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं। वह कहती हैं कि यह संख्या भारत, बांग्लादेश और नेपाल से होने वाली मानव तस्करी के भयावह परिदृश्य को प्रस्तुत करती है।
कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहीं अनन्या ने बताया, "इनमें से कुछ लड़कियों को वेश्यालयों को बेच दिया जाता है जबकि कुछ को खेतों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। खूबसूरत दिखने वाली लड़कियों को मध्य पूर्व में भेजा जाता है। इनसे कुछ कम खूबसूरत लड़कियों को मुंबई भेजा जाता है।"
तस्करी की वजह गरीबी
वह कहती हैं, "लड़कियों की तस्करी की वजह गरीबी, परिवारों का टूटना, घरेलू हिंसा, पति द्वारा परित्याग, संघर्ष या प्राकृतिक आपदाएं हो सकती हैं। जिन लड़कियों की तस्करी हुई है उनसे मैं कम से कम एक बार मिली हूं, ये लड़कियां गरीब परिवारों से थीं और इनमें से कई एक साथ बहुत सी परेशानियों से जूझ रही थीं।"
अनन्या ने 2008 में इस परियोजना पर काम शुरू किया था। वह कहती हैं, "इसे पूरा करने में मुझे एक वर्ष का समय लगा। मैंने फिल्म निर्माण के लिए तीन देशों भारत, नेपाल और बांग्लादेश को चुना। नेपाल और बांग्लादेश लड़कियों को उपलब्ध कराते हैं जबकि भारत में इन्हें लाया जाता है। मैंने फिल्म का ज्यादातर हिस्सा नेपाल में फिल्माया है लेकिन खालिदा जिया सरकार के विरोध के चलते मैं बांग्लादेश नहीं गई।"
इंटरपोल के अनुमान के मुताबिक महिलाओं व बच्चों की तस्करी एक अरब डॉलर का वैश्विक धंधा है और हर साल यह व्यापार बढ़ता ही जा रहा है। नेपाली मूल की करीब 200,000 लड़कियां भारतीय वेश्यालयों में काम करती हैं।












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