बांग्लादेश ने शीर्ष विद्रोही को सौंपा

बांग्लादेश ने शीर्ष विद्रोही को सौंपा

सुबीर भौमिक

बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

बांग्लादेश के अधिकारियों ने शनिवार की सुबह मेघालय में दवाकी चौकी पर पूर्वोत्तर भारत के शीर्ष विद्रोही नेता रंजन दयमारी को भारत को सौंप दिया.

रंजन दयमारी उर्फ़ डीआर नाबला नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) के चेयरमैन हैं.

उन पर 2008 में असम में हुए बम धमाकों में लिप्त होने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा.

इसके अलावा मणिपुर पुलिस ने दो बड़े विद्रोही नेताओं को गिरफ़्तार करने में सफलता पाई है.

ये दोनों चरमपंथी गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट के पदाधिकारी हैं.

असम में 2008 में हुए इन धमाकों में रंजन दयमारी का हाथ माना जाता है.

इन धमाकों में तकरीबन 87 लोग मारे गए थे.

बांग्लादेश के सुरक्षा बल बार्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) ने पूर्वोत्तर बांग्लादेश के शेरपुर इलाके में एक ऑपरेशन चलाया था.

इसी ऑपरेशन के तहत बांग्लादेश ने रंजन दयमारी को गिरफ्तार किया.

जानकारों का कहना है कि रंजन दयमारी की गिरफ्तारी के साथ ही एनडीएफबी का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.

एनडीएफबी के ज्यादातर नेता रंजन दयमारी से पहले ही अलग हो चुके हैं. और भारत सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहे हैं.

एनडीएफबी के नरमपंथी नेताओं ने रंजन दयमारी को पहले ही निष्कासित कर दिया था.

वहीं, रंजन दयमारी कहते रहे हैं कि वे ही असली एनडीएफबी हैं.

सूत्रों के मुताबिक इस गिरफ्तारी के बाद अब इनके साथियों के पास भी आत्मसमर्पण के अलावा और कोई चारा नहीं रह जाएगा.

बढ़ता सहयोग

अभी दो दिन पहले ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेखहसीना ने सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस उपाय करने का वादा भारतीय प्रधानमंत्री से किया था.

बांग्लादेश के इस कदम को भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते सहयोग की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

बांग्लादेश पिछले साल ही यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के बड़े नेताओं और त्रिपुरा के चरमपंथियों को भारत को सौंप चुका है.

इनमें उल्फा के चेयरमैन अरविंद राजखोवा, राजू बरुआ, चित्रबन हजारिका, शशाधर चौधरी जैसे बड़े चरमपंथी नेता शामिल हैं.

दो चरमपंथी गिरफ़्तार

वहीं दूसरी तरफ असम पुलिस ने गुवाहटी के निकट पत्थरक्वांरी में चलाए गए एक ऑपरेशन में मणिपुर के दो चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में चरमपंथी गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट के डिप्टी चेयरमैन केशाम तोंबा और उप-सेना प्रमुख कर्नल अबू सिंह हैं.

असम पुलिस के अधिकारी बी.जे. महंत ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “ये गिरफ़्तारियां हमारे लिए बड़ी सफलता हैं.”

ये दोनों चरमपंथी इलाज कराने के लिए उस इलाके में पहुंचे थे.

जानकारों के मुताबिक इनके पकड़े जाने से मणिपुर के चरमपंथी गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट को गहरा धक्का लगेगा.

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