रेडियोधर्मी विकिरण : दिल्ली विश्वविद्यालय ने नैतिक जिम्मेदारी ली (लीड-2)

मायापुरी कबाड़ बाजार में पहुंचे रेडियोधर्मी पदार्थो का संबंध विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग की प्रयोगशाला से होने की बात उजागर होने के बाद पेंटल ने संवाददाताओं से कहा, "मैं विश्वविद्यालय समुदाय से मुआवजा देने का अनुरोध करता हूं लेकिन कोई भी मुआवजा पीड़ितों का दर्द कम नहीं कर सकता। विश्वविद्यालय को इस घटना का अफसोस है और वह इस हादसे की नैतिक जिम्मेादरी स्वीकार करता है। जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती।"

मामले की जांच के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने एक टीम भेजी है। विश्वविद्यालय ने भी जांच के लिए एक समिति गठित की है।

पेंटल ने कहा, "विश्वविद्यालय की इच्छा है कि मामले की जांच हो। भविष्य के लिए हमें इस मामले से सीख लेनी चाहिए। ऐसी घटनाएं कभी भी नहीं होनी चाहिए। "

उल्लेखनीय है कि रेडियोधर्मी विकिरण की चपेट में आए आठ व्यक्तियों में से एक की मौत हो चुकी है। कोबाल्ट 60 की चपेट में आने से आठ अप्रैल को राजेंद्र प्रसाद (35 वर्ष) की मौत हो गई थी। बुधवार को दिल्ली सरकार ने प्रसाद के परिजनों के लिए दो लाख रुपये मुआवजा राशि देने की घोषणा की थी।

बुधवार को पुलिस ने बताया कि कबाड़ बाजार में मिला कोबाल्ट 60 रसायन शास्त्र विभाग की प्रयोगशाला से नीलामी के जरिए दो माह पहले खरीदा गया था।

पश्चिमी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त शरद अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बात का पता लगाया जा रहा है कि क्या रेडियोधर्मी पदार्थ को खत्म करने के लिए कोई समिति बनी थी या फिर किसी विनियामक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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