'भारत, चीन के विकास से विकासशील देशों की मदद'
वाशिंगटन, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व बैंक के एक शीर्ष अर्थशास्त्री के अनुसार चीन और भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद विकासशील देशों में गरीबी घटने की दर अभी भी धीमी ही रहेगी।
विश्व बैंक की नई रिपोर्ट के शीर्ष लेखक डेल्फिन गो ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "मंदी ऐसे समय आई जब विकासशील देश तेजी प्रगति कर रहे थे, विशेषकर गरीबी हटाने के क्षेत्र में। सभी क्षेत्रों में गरीबी दर गिर रही थी।"
उन्होंने कहा, "यहां तक कि अफ्रीका में भी नब्बे के दशक से मध्य से 2005 तक गरीबी दर में एक प्रतिशत की गिरावट हुई। जनसंख्या इस दौरान भले ही बढ़ी लेकिन चीन और भारत की प्रगति के कारण वास्तव में गरीबों की संख्या में गिरावट आई।"
विश्व बैंक की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट 'द ग्लोबल मॉनिटरटिंग रिपोर्ट 2010 : द एमडीजी' में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय संकट के कारण वर्ष 2015 तक ऐसे 5.3 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे बने रहेंगे जो मंदी के नहीं आने पर गरीबी रेखा से ऊपर होते।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत के कारण गरीबों की संख्या में भारी गिरावट आई है लेकिन भारत के बाहर गरीबी में कम गिरावट हुई है।
गो ने कहा कि भारत और चीन ने कुछ अन्य गरीब देशों को बाजार उपलब्ध कराया है। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि विकासशील देशों में वृद्धि प्रोत्साहन पैकेजों और अमीर देशों के बाजारों पर निर्भर करेगी।
गरीब देशों में आने वाले वर्षो में विकास को देखते हुए गो ने कहा कि विकासशील देशों को सदी के विकास लक्ष्यों को हासिल करने की गति को फिर हासिल करने की आवश्यकता है। परंतु इसके लिए उनको व्यापार विस्तार, बाजारों तक खुली पहुंच, कम ब्याज पर निजी पूंजी और विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं का निरंतर समर्थन चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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