लाजपत नगर धमाके में सज़ा

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने चौदह साल पहले लाजपत नगर बाज़ार में हुए धमाके के तीन दोषियों को फांसी और एक को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
गुरुवार को इस मामले में कुल छह दोषियों में से चार को ही सज़ा सुनाई गई क्योंकि दो दोषियों को अदालत ने यह कह कर छोड़ दिया कि वो अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं.
अदालत ने मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद अली भट्ट और मिर्ज़ा निसार हुसैन को फांसी जबकि जावेद अहमद ख़ान को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.
सभी दोषियों का संबंध कथित रुप से चरमपंथी संगंठन जम्मू और कश्मीर इस्लामिक फ़्रंट (जेकेआईएफ़) से बताया जाता है.
वर्ष 1996 में लाजपत नगर मार्केट में हुए धमाके में 13 लोगों की जान चली गई थी जबकि 38 लोग घायल हुए थे.
लाजपत नगर धमाके मामले में आठ अप्रैल को दिल्ली के एक ज़िला और सत्र न्यायाधीश एसपी गर्ग ने दस में से छह अभियुक्तों को दोषी पाया था जबकि चार को सुबूतों की कमी के आधार पर बरी कर दिया था.
इससे पहले अभिजोजन पक्ष के वकील ने अदालत से चार दोषियों को फांसी की सज़ा देने की अपील की थी.
अभियोजन पक्ष के वकील एसके दास का तर्क था कि छह में से चार अभियुक्तों को जघन्य अपराध का दोषी पाया गया है, इसलिए उन्हें बिना किसी रहम के मौत की सज़ा मिलनी चाहिए.
लाजपत नगर धमाके मामले में कथित रुप से जेकेआईएफ़ के छह सदस्य मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद अली भट्ट, मिर्ज़ा निसार हुसैन, जावेद अहमद ख़ान, फ़ारूक़ अहमद ख़ान और उनकी महिला साथी फ़रीदा डार को धमाके से जुड़ी अलग-अलग भूमिका का दोषी पाया गया था.
मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद अली भट्ट, मिर्ज़ा निसार हुसैन और जावेद अहमद ख़ान को हत्या, हत्या की कोशिश और आपराधिक साज़िश का दोषी पाया गया था. जबकि फ़ारूक़ अहमद ख़ान और महिला साथी फ़रीदा डार को विस्फ़ोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियिम के तहत दोषी पाया गया था.
धमाके कुछ दिन बाद ही पुलिस ने इस मामले में दस लोगों को गिरफ़्तार कर लिया था.
सुबूतों की कमी के आधार पर मिर्ज़ा इफ़्तिख़ार हुसैन उर्फ़ सबा, लतीफ़ अहमद वाज़ा, सैयद मक़बूल शाह और अब्दुल गनी उर्फ़ निक्का को बरी कर दिया गया था.












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