मनु शर्मा के लिए सभी दरवाजे बंद : सबरीना

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए उम्रकैद के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को बरकरार रखा। सबरीना ने संवाददाताओं से कहा, "11 साल के बाद.. मुझे इस बात की खुशी है कि इस मामले में अंतिम द्वार भी बंद हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से हमें राहत और संतुष्टि मिली है।"

न्यायमूर्ति पी. सथशिवम और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शर्मा के खिलाफ दिसंबर 2006 में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। शर्मा ने फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

सबरीना ने कहा, "जब दोषी को निचली अदालत ने बरी कर दिया था तो उस वक्त मैं निराश हो गई थी। ऐसे मामलों में जब रसूखदार लोग शामिल होते हैं तो भी हमें निराश नहीं होना चाहिए। यदि समाज हमारे साथ लड़ाई लड़े तो आशा की किरण बनी रहती है। हमें यह मानना चाहिए कि दुनिया में अभी भी न्याय है।"

सबरीना ने कहा, "हमारे मामले में मध्यमवर्गीय लोगों ने समर्थन दिया। उन्होंने जेसिका को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन की शुरुआत की। कई ऐसे लोग हमारे साथ आए, जिन्हें मैं पहचानती भी नहीं हूं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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