थरूर पर लटकी हुई है तलवार (राउंडअप)
थरूर ने रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। समझा जाता है कि इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी सफाई पेश की।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद थरूर ने पत्रकारों से कोई बात नहीं की और वह सीधे वहां से रवाना हो गए।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रधानमंत्री से हुई थरूर की मुलाकात की पुष्टि तो की लेकिन उन्होंने विस्तार से जानकारी देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि सच्चाई का पता लगाने के बाद ही वह कोई कार्रवाई करेंगे।
प्रधानमंत्री से थरूर की लगभग 50 मिनट तक हुई मुलाकात को अहम माना जा रहा है क्योंकि रविवार शाम को ही कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई है, जिसमें थरूर की किस्मत का फैसला किया जाना संभावित है।
कोर ग्रुप की बैठक में प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल हिस्सा लेंगे।
विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी दलों ने थरूर के इस्तीफे की मांग की है।
उधर सुनंदा के वकील आशीष मेहता ने रविवार को समाचार चैनल एनडीटीवी के माध्यम से जानकारी दी कि पुष्कर ने इस फ्रेंचाइजी टीम में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी है। इसी चैनल ने खबर दी थी कि रेंदेवू स्पोर्ट्स ने कंपनी कानून का उल्लंघन करते हुए सुनंदा को हिस्सेदारी सौंपी थी। इस बात का खुलासा होते ही मेहता ने सुनंदा की ओर से जारी बयान पढ़ा, जिसमें साफ लिखा था कि वह टीम में अपनी हिस्सेदारी छोड़ रही हैं।
मेहता ने कहा, "सुनंदा ने तत्काल प्रभाव से रेंदेवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड फ्रेंचाइजी टीम में दी गई हिस्सेदारी छोड़ने का फैसला किया है। इस फैसले का थरूर से कोई संबंध नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत फैसला है।"
मोदी ने सुनंदा का जो बयान मीडिया के सामने पढ़ा, वह इस प्रकार है, "मेरा पेशेवर करियर 20 वर्ष का रहा है और मैंने काफी मेहनत से अनुभव बटोरा है। मैं रेंदेवू में अपनी भूमिका को लेकर फैलाई जा रही मनगढं़त और आक्रामक खबरों को लेकर आहत हूं।"
"मैं अगले दस वर्षो तक कोच्चि फ्रेंचाइजी टीम को ब्रांड बनाने के बारे में सोच रही थी। मैं इस टीम के मैच भारत और खाड़ी के देशों में कराना चाहती थी लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि अपनी हिस्सेदारी को लेकर मैं इतनी मुसीबत में पड़ जाउंगी। अब मैं इस काम के साथ नहीं जुड़े रहना चाहती।"
मेहता ने बताया कि सुनंदा ने हिस्सेदारी छोड़ने का इरादा शनिवार को ही कर लिया था लेकिन चूंकि वह उसकी पुष्टि के लिए उपलब्ध नहीं थीं, लिहाजा उनके बयान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता था।
सुनंदा का यह फैसला थरूर द्वारा प्रधानमंत्री से भेंट किए जाने के कुछ घंटों के बाद सार्वजनिक किया गया। थरूर ने प्रधानमंत्री से मिलकर अपना पक्ष रखा क्योंकि विपक्ष उनकी बर्खास्तगी की जोरों से मांग कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि कोच्चि फ्रेंचाइजी टीम का मालिकाना हक रेंदेवू स्पोर्ट्स के पास है और सुनंदा काफी समय से उसके सलाहकार के तौर पर काम कर रही हैं। सुनंदा ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि रेंदेवू ने वेतन के बदले उन्हें फ्रेंचाइजी में हिस्सेदारी दी थी।
सुनंदा ने रविवार को जारी अपने बयान में भी अपने आलोचकों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया है।
सुनंदा के बयान के मुताबिक, "एक महिला पेशेवर होने के नाते मैं इस बात से आहत हूं कि कुछ पार्टियां जानबूझकर मुझे निशाने पर ले रही हैं। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि मैं एक महिला हूं। इस कारण मैं तत्काल प्रभाव से रेंदेवू स्पोर्ट्स के साथ अपने संबंध खत्म कर रही हूं और अपनी हिस्सेदारी त्याग रही हूं। मैंने इस कंपनी के लिए अब तक जो प्रयास किए हैं, उसके लिए मुझे किसी प्रकार का हर्जाना भी नहीं चाहिए।"
सुनंदा बताती हैं कि उनके लिए यह काम नया और चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा, "मेरे लिए यह नया काम था, लिहाजा रेंदेवू स्पोर्ट्स ने मुझसे कहा कि वह वेतन के बदले मुझे अपनी कंपनी में एक छोटी हिस्सेदारी देगी। दुनिया भर में किसी नए काम को लेकर इसी तरह की प्रक्रिया चलती है। मेरे लिए यह नई बात नहीं थी।"
"मुझे यह स्वीकार करना चाहिए कि मैंने काम के बदले कोई वेतन नहीं लिया। मैं जानती थी कि इक्विटी संबंधी हिस्सेदारी कागज पर हमेशा मेरे लिए मौजूद रहेगी। इसके बाद कंपनी को कोच्चि फ्रेंचाइजी टीम का मालिकाना हक मिला और अपनी इक्विटी के कारण मेरा भी कंपनी में हिस्सा बन गया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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