मिशन की विफलता से मई में उपग्रह प्रक्षेपण पर प्रभाव नहीं

फकीर बालाजी

बेंगलुरू, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। पिछले सप्ताह क्रायोजेनिक रॉकेट का प्रक्षेपण विफल रहने के बावजूद देश के वैज्ञानिक मई में एक उन्नत दूरसंवेदी निरीक्षण उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के निदेशक एस.सतीश ने आईएएनएस से कहा, "हम काटरेसेट-2बी को तय समय पर प्रक्षेपित करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। एक छोटे रॉकेट की सहायता से इसे मई के दूसरे सप्ताह (8 से10 मई) में श्रीहरिकोटा से छोड़ने की योजना है।"

करीब 300 टन का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी15) 690 किलोग्राम के काटरेसेट-2बी को पृथ्वी की निचली कक्षा में धरती से 630 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थापित करेगा।

सतीश ने कहा कि काटरेसेट-2बी में उन्नत कैमरा लगा है जो 9.6 किलोमीटर क्षेत्रफल का भौगोलिक मानचित्र तैयार कर सकता है।

रॉकेट की लागत 100 करोड़ रुपये है और इसके साथ अल्जीरिया का उपग्रह अलसेट और कनाडा के दो नैनो उपग्रह तथा बेंगलुरू और हैदराबाद के कालेज छात्रों द्वारा बनाया गया एक उपग्रह स्टूडसेट को भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

संचार उपग्रह अलसेट का प्रक्षेपण अंतरिक्ष एजेंसी के वाणिज्यिक अंग एंट्रिक्स कारपोरेशन द्वारा होगा।

सतीश ने कहा कि पीएसएलवी-सी15 के प्रक्षेपण की सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से चल रही हैं।

उन्होंने कहा कि क्रायोजेकिन इंजन की विफलता से काटरेसेट-2बी या इसके बाद इस वर्ष के अंत में होने वाला जीसेट-5 और जीसेट-6 का प्रक्षेपण प्रभावित नहीं होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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