ज्वालामुखी के गुबार से नहीं मिली राहत

विमानन अधिकारियों का कहना है कि ज्वालामुखी से उठ रहा घना काला धुआँ अब दक्षिण और पूर्व की ओर और फैलता जा रहा है. इसके कारण इटली, हंगरी, स्विटज़रलैंड और रोमानिया उन देशों में शामिल हो गए हैं जहां हवाई अड्डों को सतर्क कर दिया गया है और कई उड़ानें रोक दी गई है.
यूरोपीय एयर ट्रैफिक एसोसिएशन यानी यूरोकंट्रोल ने जानकारी दी है कि शुक्रवार को लगभग 16 हज़ार उड़ानें रद्द करनी पड़ी. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आकलन के मुताबिक उड़ानें रद्द होने के कारण विमान कंपनियों को रोज़ाना बीस करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. ब्रिटेन में उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड के ऊपर उड़ान भरने की इजाज़त दी जा सकती है लेकिन इंग्लैंड और वेल्स की हवाई सीमा में उड़ानों पर लागू रोक कम से कम शनिवार स्थानीय समय के मुताबिक एक बजे दोपहर तक लागू रहेगी.
भारत से जाने वाली उड़ानों पर भी इसका असर पड़ा है. मुंबई हवाई अड्डे पर पाँच सौ से ज़्यादा यात्री उड़ान की अनुमति मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं. आयरलैंड से लेकर फ़िनलैंड तक हवाई अड्डे और उड़ान रूट बंद कर दिए गए हैं जिसके कारण केवल यूरोप ही नहीं बल्कि अमरीका, कनाडा और एशिया जाने वाले लाखों यात्री दिक्कत का सामना कर रहे हैं.
यूरोप में एयर ट्रैफ़िक अधिकारियों का कहना है कि सप्ताह के अंत तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है. एयर लाइंस की चिंता ये है कि राख विमानों के इंजनों को जाम कर सकती है. एक विमान दुर्घटना में मारे गए पोलैंड के पूर्व राष्ट्रपति लेख काझेंस्की की अंतिम विदाई रविवार को है और आशंका है कि कई देशों के नेता इसी कारण से इसमें शामिल नहीं हो पाएँगे.
ब्रिटेन, आयरलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, बेल्जियम और नीदरलैंड्स ने गुरुवार को उड़ानें बंद कर दी थीं, जबकि उत्तरी फ़्रांस में 24 हवाई अड्डे बंद किए गए और जर्मनी के बर्लिन और हैमबर्ग हवाई अड्डे भी बंद थे.












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