'स्वास्थ्य क्षेत्र में असम बनेगा मॉडल राज्य'
अजरा रहमान
गुवाहाटी, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनएचआरएम) के तहत बेहतर काम करने और 'असम जन स्वास्थ्य विधेयक 2010' पारित होने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में असम अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल राज्य बनने को तैयार है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हिमांता बिश्व शर्मा ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "शिक्षा के अधिकार (आरटीई) की तरह ही स्वास्थ्य देखभाल संबंधी विधेयक के तहत असम सरकार सभी लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएगी।"
शर्मा के मुताबिक एनएचआरएम के तहत राज्य में काफी अच्छा काम हो रहा है और स्वास्थ्य विधेयक के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी बदलाव देखने को मिलेगा।
असम जन स्वास्थ्य विधेयक 2010 राज्य विधानसभा में एक अप्रैल को पारित किया गया था।
शर्मा ने बताया कि इस विधेयक की खास बात यह है कि निजी अस्पतालों में पहले 24 घंटों के भीतर किसी आपात स्थिति में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे परीक्षणों की सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक सड़क दुर्घटना या दिल का दौरा पड़ने जैसे मामलों में किसी मरीज को ज्यादा पैसा खर्च होने के डर से ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में ही ले जाया जाता है लेकिन इस विधेयक के तहत यह व्यवस्था की गई है कि ऐसे मरीजों को किसी भी अस्पताल में भर्ती कराया जा सके।
इस कानून के अमल में आ जाने के बाद इसके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक स्थायी समिति का गठन किया जाएगा।
शर्मा ने बताया कि निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण देने पर भी विचार किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी स्वीकार करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विधेयक के तहत राज्य में 400 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि 50-60 अरब रुपये की यह परियोजना जनवरी 2011 से लागू हो जाने की संभावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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