यूरोप के आसमान में फैली राख, यात्री फंसे (राउंडअप)

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यूरोपीय वायु यातायात सुरक्षा संगठन यूरोकंट्रोल ने अनुमान लगाया है कि मात्र लगभग 40 प्रतिशत यूरोपीय उड़ानें ही शुक्रवार को सहज रूप में संचालित हो पाई हैं।

इसके अलावा निर्धारित 300 अटलांटिक पार उड़ानों में से कोई दो तिहाई उड़ानों के रद्द होने का अनुमान है।

यूरोकंट्रोल के उप प्रमुख ब्रायन फ्लिन ने कहा है, "यूरोपीय वायु यातायात के इतिहास में पहली बार हम इस तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।"

ज्वालामुखी की राख सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है, क्योंकि यह जेट इंजन में चला जाता है और दुर्घटना को जन्म देता है।

जेनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि राख के बैठ जाने के बाद स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर हो सकता है।

राख प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बाहर निकलने के दौरान मास्क पहनने और आंखों पर चश्मा लगाने की सलाह दी गई है।

इस राख के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके कारण यात्री जहां-तहां फंस गए हैं।

एयर इंडिया के एक उच्च अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि उत्तरी यूरोप के कई शहरों में जाने और वहां से आने वाली उड़ानों का संचालन स्थगित कर दिया गया है।

गुरुवार को एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन-टोरंटो और मुंबई-लंदन की उड़ान रद्द की गई थी।

एयर इंडिया की ओर से कहा गया है कि लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर कामकाज दोबारा शुरू होने पर उत्तरी यूरोप की ओर जाने वाली उड़ानें संचालित हो पाएंगी।

उत्तरी यूरोपीय देशों के लिए उड़ान सेवाएं देने वाली जेट एयरवेज और किंगफिशर एयरलाइंस जैसी निजी भारतीय विमानन कंपनियों ने भी लंदन जाने वाली और वहां से आने वाली उड़ाने रद्द कर दी हैं।

किंगफिशर एयरलाइंस ने शुक्रवार को लंदन जाने और वहां से आने वाली चार उड़ानें रद्द कर दी हैं।

किंगफिशर एयरलाइंस के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के उपाध्यक्ष प्रकाश मीरपुरी ने कहा, "ज्वालामुखी की राख की वजह से लंदन का हीथ्रो हवाई अड्डा बंद कर दिया गया है जिससे हमने वहां जाने वाली और वहां से आने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया।"

रद्द हुई उड़ानों में आईटी-007 मुंबई से लंदन हीथ्रो, आईटी-008 लंदन हीथ्रो से मुंबई, आईटी-001 नई दिल्ली से लंदन हीथ्रो और आईटी-002 लंदन हीथ्रो से नई दिल्ली शामिल हैं।

ज्वालामुखी की राख की वजह से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उड़ान कार्यक्रम में ऐन मौके पर परिवर्तन किया गया है। अब वह जोहांसबर्ग के रास्ते स्वदेश आएंगे।

भारत, ब्राजील और रूस (आईबीएसए) और ब्राजील-रूस-भारत-चीन (ब्रिक) सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद स्थानीय समयानुसार शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री भारत के लिए रवाना हुए थे।

पूर्व में तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री के विशेष विमान को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे उतरना था लेकिन वायुमंडल में राख की वजह से कार्यक्रम में अंतिम समय में परिवर्तन किया गया। संभावन व्यक्त की जा रही है कि प्रधानमंत्री शनिवार शाम नई दिल्ली पहुंचेंगे।

विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने भी अपनी पोलैंड यात्रा रद्द कर दी है। वह राष्ट्रपति लेख काजिंस्की के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शनिवार को पोलैंड जाने वाले थे।

कृष्णा रविवार को होने वाले अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले थे। लेकिन यूरोप में आसमान में ज्वालामुखी की राख के कारण हवाई यातायात में आए बड़े व्यवधान के चलते उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया है।

अब वारसा में भारत के राजदूत अंतिम संस्कार के मौके पर नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व करेंगे। लेकिन वारसा से मिली खबरों में कहा गया है कि काजिंस्की का अंतिम संस्कार भी स्थगित कर दिया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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