बिहार में 'अमंगलकारी' बन गई मंगलवार की रात
पटना, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के अररिया जिले की नौ वर्षीय रुखसाना के सिर से मां का आंचल छिन गया तो पूर्णिया के बायसी प्रखंड के नागेंद्र की नवविवाहिता पुत्री नीतू की हथेलियों की मेंहदी का रंग भी हल्का न हुआ था कि वह काल के गाल में समा गई।
यह कहानी केवल इन्हीं दोनों परिवारों की नहीं है। बिहार के पांच जिलों में मंगलवार रात आए तूफान ने कई लोगों के प्रियजनों को छीन लिया।
बायसी प्रखंड के नागेंद्र बताते हैं कि उस रात बड़ी अच्छी हवा चल रही थी। मैं अपनी बेटी के साथ घर के बाहर बैठा था। अचानक बहुत तेज हवा चलने लगी। वह उठकर घर के भीतर चली गई। तभी टीन की छत उस पर गिर गई और वह लहूलुहान हो गई और बाद में चल बसी।
इसी तरह अररिया के सफीपुर गांव की रुखसाना और शाकिर की मां मुर्शिदा की मौत हो गई। शाकिर (12) ने बताया कि उस रात वह और रुखसाना मां के साथ सोए थे। आंधी आने के बाद दोनों पड़ोस में चले गए। इसी बीच उसकी मां मुर्शिदा के ऊपर छत गिर गई जिससे उनकी मौत हो गई।
मजदूरी करने वाले शाकिर के पिता मोहम्मद अशफाक कहते हैं कि भले ही सरकार की तरफ से राहत के नाम पर कुछ मिल जाए लेकिन वह इन बच्चों की मां को कहां से लाएंगे।
पूर्णिया के बायसी प्रखंड के आसज ग्राम पंचायत के टिंकू ने इस तूफान में अपनी मां, बाप और भाई सबको खो दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कई लोग लापता हैं।
उल्लेखनीय है कि बिहार के पांच जिलों में आए तूफान के कारण करीब 72 लोगों की मौत हो गई और एक हजार से ज्यादा घायल हो गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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