मप्र में 75 फीसदी स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
गैर सरकारी संगठन 'समर्थन' के योगेश कुमार ने बताया, "गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक राष्ट्रीय औसत से मध्य प्रदेश में गरीबी कहीं अधिक है। इतना ही नहीं प्रति व्यक्ति औसत आय देश के मुकाबले लगभग 10 हजार रुपये कम है।"
राज्य की शिक्षा व्यवस्था का भी हाल ठीक नहीं है। यहां 75 प्रतिशत से अधिक ऐसे स्कूल हैं जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और 41 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं जहां छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था है। 10 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली की व्यवस्था है।
स्वास्थ्य सेवाओं के ब्योरे के मुताबिक नवजात मृत्युदर, शिशु मृत्युदर, जनजातीय शिशु मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इतना ही नहीं कुपोषण के मामले में भी राज्य की हालत ठीक नहीं है। एनीमिया पीड़ित बच्चों का प्रतिशत चौंकाने वाला है। मातृ मृत्युदर, रक्त की कमी से पीड़ित महिलाओं की संख्या भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
चर्चा मे हिस्सा लेते हुए यूनिसेफ की राज्य प्रमुख डॉ तान्या गोल्डनर ने कहा, " मध्यप्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में नामांकन बढ़ा है। एड्स जैसे विषयों के प्रति जागरुकता में कमी आई है और मातृ मृत्युदर व शिशु मृत्युदर में कमी आई है मगर यह संयुक्त राष्ट्र विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पार्याप्त नहीं है। "
गोल्डनर के मुताबिक बच्चों को उनके अधिकार मिलने चाहिए क्योंकि बच्चों में बदलाव आने से समाज में भी बदलाव आता है। कुपोषण के मामले में राज्य की स्थिति अच्छी नही है। स्कूलो में छात्राओं के लिए अलग शैचालय सबसे बड़ी समस्या है। इस दिशा में पहल करना जरूरी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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