भारतीय परमाणु केंद्र प्रणालियों को सुरक्षित व टिकाऊ बनाएगा
वाशिंगटन, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा मंगलवार को घोषित वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी केंद्र परमाणु सुरक्षा, विकिरण सुरक्षा और रेडियोआइसोटोप्स व विकिरण प्रौद्योगिकी जैसे परमाणु ऊर्जा प्रणाली के चार प्रमुख क्षेत्रों में अध्ययन आयोजित करेगा।
परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा स्थापित किए जाने वाले इस केंद्र में चार स्कूल होंगे, जो प्रणालियों की ऐसी डिजाइन विकसित करने के लिए अनुसंधान आयोजित करेंगे, जो पूरी तरह सुरक्षित, प्रसार रोधी और टिकाऊ हों।
उन्नत परमाणु प्रणाली अध्ययन विद्यालय डिजाइन अध्यय को अपनाएगा और उन्नत परमाणु ऊर्जा प्रणालियों का विश्लेषण करेगा।
परमाणु सुरक्षा विद्यालय की जिम्मेदारी सुरक्षा बलों को भौतिक सुरक्षा प्रणालियों और प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं के अनुप्रयोग के बारे में प्रशिक्षित करने, परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने के आधुनिक तकनीकी औजारों को विकसित करने तथा संवेदकों और प्रणालियों के मूल्यांकन और परीक्षण के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी।
रेडियोलाजिकल सुरक्षा अध्ययन विद्यालय परमाणु केंद्रों के लिए विकिरण निगरानी प्रणालियों के अनुसंधान व विकास कार्य को संचालित कराएगा। इसके अलावा यह विद्यालय परमाणु आपात प्रबंधन उपकरण का विकास करेगा तथा विकिरण परिवहन व उससे बचाव, और विकिरण रक्षा मानकों को बनाए रखने व उसमें सुधार करने संबंधित अध्ययन कराएगा।
रेडियोआइसोटोप्स एवं विकिरण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग विद्यालय स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और खाद्य, जल संसाधनों के प्रबंधन तथा दूषित जल प्रबंधन के क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान, विकास, प्रदर्शन व प्रशिक्षण सुविधाएं मुहैया कराएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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