जलवायु परिवर्तन पर समझौते के आसार

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के प्रमुख के अनुसार वर्ष 2010 के अंत तक जलवायु परिवर्तन पर बाध्यकारी क़ानून वाले समझौते पर निर्णय हो जाएगा.
कोपनहेगन सम्मेलन के बाद पहले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में इस बात को सबके सामने रखा गया.
जर्मनी में आयोजित इस सम्मेलन में क़रीब 100 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया.
समझौते की शर्तों से कई देश के प्रतिनिधि सहमत हैं जबकि ज़्यादातर देशों को इस पर आपत्ति है.
कोपनहेगन में बाध्यकारी क़ानून वाले समझौते के मुद्दे पर भारत समेत कई विकासशील देशों को आपत्ति थी.
यूरोपीय संघ इस समझौते को क़ानूनी अमली जामा पहनाने की कोशिश कर रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कोपनहेगन में विश्व के तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने की सहमति हुई थी लेकिन इस सम्मेलन में वह पूरा होता नहीं दिख रहा.
तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि इस समझौते क प्रारूप क्या होना चाहिए और इस विषय पर वर्ष में कितनी बार सम्मेलन करने की ज़रूरत है.
विकसित देशों और विकासशील देशों में इस समझौते को लेकर मतभेद है. विकसित देश मौजूदा प्रारूप पर समझौता चाहते हैं जबकि विकसित देश ऐसा नहीं चाहते हैं.












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