शिक्षिका बनने के सपने संजो रही है भंवरी
उदयपुर, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। तेतालिस वर्षीया भंवरी देवी प्रजापत किसी भी अन्य किसान पत्नी की तरह ही कड़ी मेहनत करती हैं लेकिन वह औरों से अलग सपने देखने का साहस भी रखती हैं।
चार बच्चों की मां भंवरी शिक्षिका बनना चाहती हैं। उन्होंने हाल ही में तीसरी बार दसवीं की परीक्षा दी है।
कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती लेकिन भंवरी के लिए यह आसान नहीं था।
राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुंडा के नजदीक 5,000 लोगों की आबादी वाले कमोल गांव की निवासी भंवरी की तीन बेटियां और एक बेटा है।
उनकी सबसे बड़ी बेटी रेखा ने कक्षा सात तक पढ़ाई की है और उसकी शादी हो चुकी है। उनके बेटे महेंद्र ने कक्षा नौ की परीक्षा दी है। उनकी एक और बेटी पूजा कक्षा सात में है और सबसे छोटी बेटी दीपिका कक्षा दो में है।
बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करने वाली भंवरी ने खुद की आकांक्षाओं को भी छोड़ा नहीं है। वह हमेशा से एक शिक्षिका बनना चाहती थीं।
तीन साल पहले कक्षा नौ की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 'अनुबंधित शिक्षक' नियुक्त किया गया था। अब वह 'वरिष्ठ शिक्षण प्रमाण पत्र' (एसटीसी) कोर्स करना चाहती हैं। कक्षा 12 तक उत्तीर्ण होने के बाद ही यह कोर्स किया जा सकता है।
भंवरी ने आईएएनएस से कहा, "मैं एक शिक्षक बनना चाहती हूं इसलिए मेरी एसटीसी कोर्स करने की योजना है।"
बुनियादी शिक्षा की मांग को पूरा करने के लिए औपचारिक और साथ ही साथ वैकल्पिक स्कूलों में नियमित शिक्षकों से कम वेतन पर सरकार या एक निकाय द्वारा अनुबंधित शिक्षक नियुक्त किए जाते हैं।
परा शिक्षकों की नियुक्ति को दूरस्थ बस्तियों तक शिक्षा की उपलब्धता को सर्वव्यापी बनाने के उद्देश्य के रूप में देखा जाता है।
वह कहती हैं, "मेरे अनुबंधित शिक्षक सहयोगियों ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया है।"
क्या उनकी उम्र उन्हें हतोत्साहित नहीं करती है, पूछने पर वह कहती हैं, "मुझे इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। फर्क क्यों पड़ना चाहिए? मैं पढ़ना चाहती हूं और मैं हमेशा महसूस करती हूं कि उम्र आपको सीखने से नहीं रोक सकती।"
दसवीं की परीक्षा में दो बार असफल होने के बावजूद भंवरी अडिग हैं। वह आत्मविश्वास से कहती हैं, "इस साल मैंने परीक्षा में अच्छा किया है और मुझे सफलता की उम्मीद है।"
ग्रामीण भंवरी के अध्ययन के प्रति संकल्प को देखकर विस्मित हैं और उन्हें प्रोत्साहित करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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