'सीआरपीएफ की गलत योजना नरसंहार के लिए जिम्मेदार'
कोलकाता, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल पुलिस के एक पूर्व खुफिया प्रमुख का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों हुए 70 से ज्यादा जवानों के नरसंहार के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की गलत योजना एक महत्वपूर्ण कारक है।
अमिय सामंत ने एक साक्षात्कार में कहा कि सुरक्षा बलों को नक्सलियों तक महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां पहुंचने से रोकने के लिए उनके आस-पास मौजूद लोगों और अपने शिविरों की जांच करने की आवश्यकता है।
सामंत ने आईएएनएस से कहा, "यह एक स्थापित तथ्य है कि क्षति को न्यूनतम करने के लिए सुरक्षा बल छोटे-छोटे समूहों में नक्सली इलाकों में जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के जवान वाहनों में पहुंचे थे। यहीं पर उनकी योजना में खामी थी। नक्सली जाल बिछाकर बारूदी सुरंग विस्फोट करने की प्रतीक्षा में थे।"
नक्सलियों ने मंगलवार को बस्तर के घने जंगलों में अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार किया, जिसमें सीआरपीएफ के 75 जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। उन्होंने अधिक संख्या में पहुंचे सुरक्षा बलों पर सात घंटे तक गोलियां चलाईं और बमों से हमला किया।
सामंत पश्चिम बंगाल पुलिस में खुफिया विभाग के पूर्व महानिदेशक हैं। अस्सी के दशक के मध्य में वह नई दिल्ली स्थित खुफिया ब्यूरो में भी संयुक्त निदेशक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि नक्सलियों को पहले से यह जानकारी थी कि सुरक्षा बल बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा के जंगलों में से किस रास्ते से होकर गुजरेंगे।
उन्होंने कहा, "एक ओर सुरक्षा बलों की खुफिया जानकारी में खामी थी, उन्हें पता नहीं था कि क्षेत्र में नक्सलियों का डेरा था। दूसरी ओर नक्सलियों को उनके काफिले के वहां से गुजरने के रास्ते और समय का पता चल गया था।"
सामंत ने सुरक्षा बलों को उनकी कार्रवाईयों की गोपनीयता कायम रखने के प्रति सावधान किया है।
उन्होंने कहा, "उन्हें पता होना चाहिए कि किस तरह से सुरक्षित रहा जा सकता है साथ ही उन्हें सूचना प्राप्त करने के नक्सलियों के विभिन्न तरीकों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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