परमाणु संधियों के लिए दबाव नहीं डालेगा अमेरिका
वाशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर भारत के जिम्मेदाराना दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) या व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर शीघ्र हस्ताक्षर करने के लिए भारत पर दबाव नहीं डालेगा।
बहरहाल अमेरिका चाहता है कि एनपीटी और सीटीबीटी के भेदभावपूर्ण होने के आधार पर इन पर हस्ताक्षर करने से इंकार करने वाला भारत परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ओबामा प्रशासन के साथ मिलकर काम करे।
परमाणु अप्रसार और हथियार नियंत्रण पर अमेरिका के विशेष सलाहकार रॉबर्ट जे.इनहॉर्न ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, "वैश्विक परमाणु प्रसार के साथ परमाणु आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए अमेरिका और भारत की साझेदारी बढ़ती जा रही है। हम इन मुद्दों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय आधार पर अक्सर बातें करते रहते हैं।"
उन्होंने कहा, "परमाणु अप्रसार संधि पर भारत के रुख को हम समझते हैं और उसकी प्रशंसा करते हैं। उनका यह रुख लंबे समय से है, यह एक सैद्धांतिक स्थिति है। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि भारत जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करता है।"
इनहॉर्न ने कहा, "जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करते हुए भारत किसी भी हालत में केवल कुछ समय के लिए एनपीटी में शामिल नहीं होगा। हम उसे समझते हैं लेकिन हम चाहते हैं कि परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भारत हमारे साथ काम करे।"
इनहॉर्न ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक अमेरिकी सीनेट सीटीबीटी को मंजूरी नहीं देती अमेरिका भारत को इस पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि एक बार संधि को सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने के तरीकों पर चर्चा होगी।
इनहॉर्न ने कहा कि सीटीबीटी के संदर्भ में प्रशासन सीनेट से मंजूरी मिलने के लिए कड़ा प्रयास कर रहा है और उसके बाद इसे लागू करने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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