सूचना आयोग की दिलचस्पी सूचना छुपाने में : सजग
सजग के डॉ. ज्योति प्रकाश ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों में राज्य के सूचना आयोग से मिले जवाब पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सजग ने आवेदन देकर छह बिंदुओं को आधार बनाकर जानकारियां मांगी जिस पर उन्हें सिर्फ तीन बिंदुओं की ही जानकारी दी गई है। शेष का तर्कसंगत जवाब नहीं दिया गया।
ज्योति प्रकाश का आरोप है कि सूचना आयोग यह भी बताने तैयार नहीं है कि सूचना के अधिकार के तहत कितने आवेदन आए हैं और उनमें से कितनों का निराकरण हुआ एवं कितने लंबित हैं। इतना ही नहीं अन्य विषयों की जानकारी आयोग देने से कतराता है।
सूचना आयोग ने एक बयान दिया था कि सूचना के अधिकार का कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पर सजग ने आयोग से जानना चाहा कि ऐसे कितने मामले आए हैं जिनमें सूचना के अधिकार का उपयोग ब्लैकमेल करने एवं धमकाने के लिए किया गया, इसका जवाब नहीं दिया जा रहा है।
उनका आरोप है कि राज्य सूचना आयोग पर जिम्मेदारी है कि वह सूचना के अधिकार का हक आम लोगों को दिलाए मगर मध्य प्रदेश में राज्य सूचना आयोग उन लोगों के लिए संरक्षण का काम कर रहा है जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। यही कारण है कि गड़बड़ियों में लिप्त लोगों को दंड नहीं मिल पा रहा है और सूचना का अधिकार सिर्फ कागजी बनकर रह गया है।
इस संबंध में राज्य सूचना आयोग के दो अधिकारियों से संपर्क किया गया मगर उन्होंने इन आरोपों पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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