तलाक के लिए ट्विटर भी हो सकता है सबूत

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्विटर और फेसबुक व ऑर्कुट जैसी सोशल नेटवर्किं ग साइट्स व्यक्ति की मन:स्थिति बताती हैं, इसलिए कानूनी मामलों में स्थानापन्न सबूत के रूप में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

'आईटी अधिनियम 2000' में पिछले साल अक्टूबर में संशोधन कर यह नई धारा जोड़ी गई थी।

तीस वर्षीय अनु शर्मा को शक था कि उनके पति उनसे झूठ बोलते हैं और घर से बाहर रहने के लिए हमेशा व्यापार संबंधी जरूरी यात्राओं के विषय में कहते हैं। एक दिन उन्हें ट्विटर पर इसका सबूत मिल गया। उन्होंने ट्विटर को सबूत बनाते हुए तलाक का मुकदमा दायर कर दिया।

उच्चतम न्यायालय के वकील पवन दुग्गल कहते हैं, "आईटी अधिनियम 2000 प्राथमिक रूप से ई-वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, उस समय सोशल नेटवर्किं ग के बारे में सुना भी नहीं था। इसलिए माइक्रोब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किं ग साइट्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए यह नई धारा जोड़ी गई है।"

दुग्गल ने आईएएनएस से कहा कि अब कानूनी मामलों खासकर तलाक के मामलों में आजकल इनका प्रयोग बढ़ रहा है यद्यपि यह पिछले साल से ही शुरू हुआ है।

अनु के मामले का हवाला देते हुए दुग्गल ने कहा, "मेरे पति कहते थे कि उन्हें व्यापार यात्राओं के लिए बाहर जाना पड़ रहा है लेकिन वह दोस्तों और अन्य लोगों से मिलते रहते थे।" उन्होंने कहा कि अंतत: जब उनके पति ने एक यात्रा के दौरान ट्विटर के जरिए दोस्तों को बीयर की दावत दी तब पता चला कि वह शहर में ही हैं।

दुग्गल ने आईएएनएस से कहा, "ट्विटर और अन्य सोशल नेटवर्किं ग साइट्स के संदेशों का स्थानापन्न सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और ये सबूत उतने ही महत्वपूर्ण होंगे जितने कि प्राथमिक सबूत।"

दुग्गल ने कहा कि इस तरह की साइट्स के जरिए सार्वजनिक तौर पर दिए गए किसी भी बयान को सबूत बनाया जा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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