चीन के साथ नत्थी वीजा मुद्दे को उठाएंगे कृष्णा (लीड-1)
इनमें सीमा विवाद, जम्मू एवं कश्मीर में चीनी गतिविधियां और जम्मू एवं कश्मीर से संबंधित भारतीय नागरिकों को अलग से नत्थी किया हुआ वीजा जारी करने जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने यहां संवाददाताओं से कहा, "चीन के साथ सीमा मुद्दे पर, जम्मू एवं कश्मीर में चीन की निर्माण संबंधी गतिविधियों पर और कश्मीरियों को नत्थी किया हुआ वीजा जारी करने को लेकर असहमतियां हैं।"
प्रकाश ने कहा, "इन सभी मुद्दों को मित्रता की भावना के साथ निपटाने की तथा असहमति के इन क्षेत्रों को समाप्त करने की दोनों पक्षों के पास परिपक्व ता और आत्मविश्वास है।"
प्रकाश ने चीन के साथ संबंधों के विकास को सरकार की विदेश नीति की एक सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। प्रकाश ने कहा कि बीजिंग के साथ रिश्ते को विकसित करने को लेकर देश में एक व्यापक राजनीतिक सहमति है।
कृष्णा सोमवार को बीजिंग के चार दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। विदेश मंत्री बनने के बाद कृष्णा का यह पहला चीन दौरा होगा। इस दौरान विदेश सचिव निरूपमा राव सहित विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ होंगे।
कृष्णा, चीनी विदेश मंत्री यांग जीची के साथ कई सारे मुद्दों पर बातचीत करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने को लेकर व्यापक तौर पर चर्चा करेंगे। कृष्णा चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से भी मुलाकात करेंगे।
इस दौरान कृष्णा चीन में भारत महोत्सव का औपाचारिक रूप से उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेंगे।
दोनों पक्ष सीमा विवाद के हल के लिए अपने विशेष प्रतिनिधियों के बीच 14वें दौर की बातचीत के लिए तारीखें भी तय कर सकते हैं।
इसके साथ ही सरकार ने कृष्णा के बीजिंग दौरे के पूर्व शनिवार को चीन से कहा कि वह जम्मू एवं कश्मीर से संबंधित भारतीय नागरिकों को अलग से नत्थी किया हुआ वीजा जारी करना बंद करे। सरकार ने कहा कि बीजिंग को इस मुद्दे पर नई दिल्ली की प्रमुख चिंता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
विदेश मंत्रालय में चीन और पूर्व एशियाई मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव गौतम बंबावाले ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हमने चीन से कहा है कि वह दोहरी वीजा नीति से बाज आए।"
बंबावाले ने कहा, "भारत के लिए यह मामला प्रमुख चिंता का विषय है, क्योंकि यह हमारी क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा हुआ है। हम इस मुद्दे को लेकर चीन पर दबाव बनाए रखेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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